काशीपुर

काशीपुर-ऊधम सिंह नगर में साइबर अपराध और पुलिस की ‘स्ट्राइक’

तकनीकी प्रगति के साथ-साथ काशीपुर में साइबर ठगी के ग्राफ में भी चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में ऊधम सिंह नगर की साइबर सेल ने एक बड़े...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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9 अप्रैल 2026, 05:12 पूर्वाह्न 0 व्यूज 2 मिनट पढ़ें
त्वरित सारांश
स्थान काशीपुर
पढ़ने का समय 2 मिनट
रिपोर्टर Yogesh
अपडेट किया गया 6 months पहले

तकनीकी प्रगति के साथ-साथ काशीपुर में साइबर ठगी के ग्राफ में भी चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है। हाल ही में ऊधम सिंह नगर की साइबर सेल ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने गदरपुर और काशीपुर के निवासियों से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की थी।

मामले की गहराई: गिरोह ने पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर भारी मुनाफे का लालच दिया। जब पीड़ित ने 24.70 लाख रुपये का निवेश कर दिया, तो उसके बाद आरोपियों ने उससे संपर्क तोड़ लिया। पुलिस जांच में पाया गया कि ठगी की रकम दर्जनों ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) के जरिए देशभर में फैलाई गई थी। पुलिस ने गदरपुर से मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से फर्जी आईडी, सिम कार्ड और कई बैंकों की पासबुक बरामद की हैं।

पुलिस की नई रणनीति: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देशानुसार, जिले में ‘ऑपरेशन कालनेमि’ चलाया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर ‘साइबर जागरूकता’ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। काशीपुर कोतवाली में स्थापित नया साइबर डेस्क अब एआई-आधारित टूल्स का उपयोग कर रहा है ताकि ट्रांजेक्शन होते ही ठगी गई रकम को तुरंत फ्रीज किया जा सके। जनता को सलाह दी जा रही है कि वे अनजाने लिंक्स पर क्लिक न करें और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी वित्तीय जानकारी साझा न करें।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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