उत्तराखंड
हिमालय की गोद में बसा देवभूमि
उत्तराखंड भारत के उत्तर में स्थित एक हिमालयी राज्य है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक विरासत, समृद्ध लोकसंस्कृति, हिमालयी नदियों और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है।
उत्तराखंड के बारे में जानेंउत्तराखंड का परिचय
उत्तराखंड भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक पर्वतीय राज्य है, जिसकी उत्तरी सीमाएं तिब्बत (चीन) और पूर्वी सीमाएं नेपाल से मिलती हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश स्थित हैं। राज्य का कुल क्षेत्रफल 53,483 वर्ग किलोमीटर है।
उत्तराखंड को "देवभूमि" कहा जाता है क्योंकि यहां हिंदू धर्म के अनेक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल, मंदिर और आश्रम स्थित हैं। गंगा, यमुना, अलकनंदा और भागीरथी जैसी पवित्र नदियाँ यहीं से निकलती हैं।
भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से राज्य दो प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित है — गढ़वाल (पश्चिमी भाग) और कुमाऊँ (पूर्वी भाग)। राज्य में हिमालय की ऊंची पर्वत चोटियां, हिमनद, घने जंगल, नदी घाटियां और उपजाऊ तराई क्षेत्र शामिल हैं।
उत्तराखंड आध्यात्मिकता, पर्यटन, जैव विविधता, लोक संस्कृति और जल संसाधनों की दृष्टि से भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है।
उत्तराखंड का इतिहास
उत्तराखंड का इतिहास अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और विविधताओं से भरा हुआ है। इस क्षेत्र का उल्लेख पुराणों और महाभारत में केदारखंड (गढ़वाल) और मानसखंड (कुमाऊँ) के नाम से मिलता है।
प्राचीन कालऋग्वेद, महाभारत और पुराणों में इस हिमालयी क्षेत्र का विस्तृत वर्णन है। नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग और विष्णुप्रयाग जैसे संगम स्थल प्राचीन काल से ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। आदि शंकराचार्य ने चारों धामों की यात्रा की और केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे तीर्थों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कत्यूरी वंश ने इस क्षेत्र पर सदियों तक शासन किया और अनेक मंदिरों, बावड़ियों और प्रशासनिक केंद्रों का निर्माण किया।
मध्यकालीन कालमध्यकाल में कुमाऊँ में चंद वंश और गढ़वाल में गढ़वाल राजवंश का शासन रहा। अजयपाल ने गढ़वाल के छोटे-छोटे गढ़ों को एकत्रित करके एक सशक्त गढ़वाल राज्य की स्थापना की। चंद शासकों ने कुमाऊँ में व्यापार, संस्कृति और मंदिर निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। इस काल में तिब्बत के साथ व्यापारिक संबंध भी विकसित हुए।
गोरखा शासन18वीं शताब्दी के अंत में गोरखा शासकों ने कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों पर अधिकार जमा लिया। गोरखा शासन कठोर था और जनता को भारी कर-भार और बेगार प्रथा का सामना करना पड़ा। 1814-1815 के एंग्लो-नेपाल युद्ध में गोरखा सेना की पराजय हुई और सुगौली संधि के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया।
ब्रिटिश कालब्रिटिश शासनकाल में नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, लैंसडाउन, अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय नगरों का विकास हुआ। ग्रीष्मकालीन राजधानियां और सैनिक छावनियां स्थापित हुईं। सड़क निर्माण, शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तार हुआ। उत्तराखंड के वीरों ने प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में अभूतपूर्व साहस का प्रदर्शन किया। स्वतंत्रता आंदोलन में भी यह क्षेत्र सक्रिय रहा।
राज्य आंदोलनस्वतंत्रता के बाद उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहा। पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए एक अलग पर्वतीय राज्य की माँग सदियों से उठती रही। 1994 में मुजफ्फरनगर की घटनाओं के बाद यह आंदोलन और तीव्र हो गया। छात्रों, महिलाओं और स्थानीय समुदायों ने बड़ी संख्या में इस आंदोलन में भाग लिया। अंततः 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल राज्य की स्थापना हुई। 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।
आधुनिक उत्तराखंडराज्य गठन के बाद से उत्तराखंड ने पर्यटन, जलविद्युत, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेज़ी से विकास किया है। 2013 की केदारनाथ आपदा और कई अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता की परीक्षा ली। पलायन, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा आज के प्रमुख मुद्दे हैं। राज्य सरकार और नागरिक समाज मिलकर सतत विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
उत्तराखंड के राज्य प्रतीक एवं पहचान
उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान, राज्य चिह्न और महत्वपूर्ण तथ्य।
राज्य पशु
राज्य पक्षी
राज्य पुष्प
राज्य वृक्ष
राज्य की राजधानी
ग्रीष्मकालीन राजधानी
उच्च न्यायालय
राज्य का उपनाम
स्थापना दिवस
उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप एवं प्राकृतिक विभाजन
उत्तराखंड मध्य हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जो हिमाच्छादित शिखरों, संकीर्ण घाटियों, सघन वनों और तराई-भाबर के मैदानों में बंटा है।
उच्च हिमालय (ग्रेटर हिमालय)
4,800 मीटर से 7,816 मीटर (नंदा देवी) तक की हिमाच्छादित चोटियां, विशाल हिमनद (गंगोत्री, पिंडारी, मिलम) और अल्पाइन बुग्याल। यह क्षेत्र भारत की प्रमुख नदियों का स्रोत है।
ऊंचाई: 4,800m+मध्य हिमालय (लेसर हिमालय)
1,500 से 3,500 मीटर ऊंचाई वाला क्षेत्र जहां मसूरी, नैनीताल, रानीखेत और कौसानी जैसे प्रमुख हिल स्टेशन स्थित हैं। देवदार, बांज और बुरांश के घने वनों से आच्छादित।
ऊंचाई: 1,500 - 3,500mशिवालिक एवं दून घाटियां
बाहरी हिमालय की कम ऊंचाई वाली पर्वतमालाएं (600–1,200 मी.) और उनके बीच स्थित समतल अनुदैर्ध्य घाटियां (जैसे देहरादून, क्यारदा दून)। यह उपजाऊ और घनी आबादी वाला क्षेत्र है।
ऊंचाई: 600 - 1,200mभाबर एवं तराई क्षेत्र
शिवालिक के ठीक दक्षिण में कंकड़-पत्थरों से निर्मित भाबर और उसके नीचे अत्यधिक उपजाऊ, जल-समृद्ध तराई का मैदानी भाग (उधम सिंह नगर व हरिद्वार)। यह राज्य का कृषि व औद्योगिक केंद्र है।
मैदानी व कृषि भूभागउत्तराखंड की पवित्र नदियां
उत्तराखंड भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। गंगा, यमुना, अलकनंदा, भागीरथी और अनेक पवित्र नदियां यहीं से निकलती हैं।
गंगा
यमुना
अलकनंदा
भागीरथी
मंदाकिनी
सरयू
काली / शारदा
रामगंगा
उत्तराखंड की पर्वत चोटियां और हिमनद
नंदा देवी, त्रिशूल, पंचाचूली और अनेक हिमालयी चोटियां उत्तराखंड की शान हैं। प्रमुख हिमनद यहां की नदियों का स्रोत हैं।
उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति
लोकनृत्य, लोकगीत, मेले, पारंपरिक वेशभूषा और स्वादिष्ट व्यंजनों की विविधता उत्तराखंड को अनूठा बनाती है।
राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य
उत्तराखंड जैव विविधता का खजाना है। जिम कॉर्बेट, नंदा देवी और फूलों की घाटी जैसे यूनेस्को धरोहर स्थल यहां हैं।
उद्यान
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
उद्यान
राजाजी राष्ट्रीय उद्यान
उद्यान
फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान
उद्यान
नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान
उद्यान
केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य
उद्यान
देहरादून चिड़ियाघर (मालसी डियर पार्क)
उद्यान
गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान
उद्यान
अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य
तीर्थस्थल और पर्यटन
चार धाम से लेकर हिल स्टेशनों तक — उत्तराखंड में हर श्रद्धालु, पर्यटक और साहसी के लिए कुछ खास है।
नैनी झील
काठगोदाम रेलवे स्टेशन
मुक्तेश्वर धाम
औली
देवरिया ताल
मसूरी
रॉबर्स केव (गुच्चूपानी)
सहस्रधारा
वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई)
लच्छीवाला नेचर पार्क
घंटाघर (क्लॉक टॉवर)
रानीखेत
दयारा बुग्याल
मुनस्यारी
चांडक हिल्स
टिहरी बांध एवं झील
धनोल्टी इको पार्क
खिर्सू
चौखम्बा व्यू पॉइंट
ऐबट माउंट
कौसानी
पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक
गिरी ताल (काशीपुर)
नैना देवी मंदिर
कैंची धाम
हर की पैड़ी
मनसा देवी मंदिर
चंडी देवी मंदिर
भारत माता मंदिर
शांतिकुंज
हेमकुंड साहिब
तुंगनाथ एवं चंद्रशिला
रुद्रप्रयाग संगम
ऋषिकेश
टपकेश्वर महादेव मंदिर
माइंड्रोलिंग बौद्ध मठ
संतला देवी मंदिर
जागेश्वर धाम
कसार देवी मंदिर
चितई गोलू देवता मंदिर
विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी
पाताल भुवनेश्वर गुफा
सुरकंडा देवी मंदिर
देवप्रयाग संगम
कंडोलिया मंदिर
पूर्णागिरि
बालेश्वर मंदिर
बाबा बागनाथ मंदिर
नानकमत्ता साहिब
अटारिया मंदिर (रुद्रपुर)
चार धाम
बद्रीनाथ
चार धाम
केदारनाथ
चार धाम
गंगोत्री
चार धाम
यमुनोत्री
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और स्थानीय उत्पाद
आर्थिक परिदृश्य एवं मुख्य क्षेत्र
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था मुख्यतः पर्यटन, कृषि, जलविद्युत और वन-आधारित उद्योगों पर निर्भर है। चारधाम यात्रा और हिमालयी पर्यटन से राज्य को सालाना करोड़ों रुपये की आय होती है।
पर्वतीय कृषि में मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, राजमा और आलू की खेती प्रमुख है। सेब, आड़ू, खुबानी और नाशपाती जैसे बागवानी फल भी महत्वपूर्ण हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं।
जड़ी-बूटी संग्रह, ऊनी वस्त्र, रिंगाल शिल्प और स्थानीय हस्तशिल्प ग्रामीण आजीविका के प्रमुख साधन हैं। महिला स्वसहायता समूह स्थानीय उत्पादों के उत्पादन और विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
टिहरी, श्रीनगर और कई जलविद्युत परियोजनाएं राज्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं। देहरादून और हरिद्वार में आईटी और फार्मा उद्योग भी विकसित हो रहे हैं।
प्रमुख स्थानीय उत्पाद
उत्तराखंड के 13 जिले
दो मंडलों — गढ़वाल और कुमाऊँ — में विभाजित उत्तराखंड के सभी 13 जिलों की जानकारी।
कुमाऊँ
गढ़वाल
कुमाऊँ
कुमाऊँ
गढ़वाल
गढ़वाल
गढ़वाल
कुमाऊँ
कुमाऊँ
गढ़वाल
कुमाऊँ
गढ़वाल
गढ़वाल