देवभूमि उत्तराखंड

उत्तराखंड

हिमालय की गोद में बसा देवभूमि

उत्तराखंड भारत के उत्तर में स्थित एक हिमालयी राज्य है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक विरासत, समृद्ध लोकसंस्कृति, हिमालयी नदियों और विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है।

उत्तराखंड के बारे में जानें
9 नव. 2000
स्थापना
53,483 वर्ग किमी
क्षेत्रफल
1.01 करोड़
जनसंख्या (2011)
13
जिले
71%
वन आवरण
7,816 मीटर
नंदा देवी (उच्चतम)
परिचय

उत्तराखंड का परिचय

उत्तराखंड भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक पर्वतीय राज्य है, जिसकी उत्तरी सीमाएं तिब्बत (चीन) और पूर्वी सीमाएं नेपाल से मिलती हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश स्थित हैं। राज्य का कुल क्षेत्रफल 53,483 वर्ग किलोमीटर है।

उत्तराखंड को "देवभूमि" कहा जाता है क्योंकि यहां हिंदू धर्म के अनेक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल, मंदिर और आश्रम स्थित हैं। गंगा, यमुना, अलकनंदा और भागीरथी जैसी पवित्र नदियाँ यहीं से निकलती हैं।

भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से राज्य दो प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित है — गढ़वाल (पश्चिमी भाग) और कुमाऊँ (पूर्वी भाग)। राज्य में हिमालय की ऊंची पर्वत चोटियां, हिमनद, घने जंगल, नदी घाटियां और उपजाऊ तराई क्षेत्र शामिल हैं।

उत्तराखंड आध्यात्मिकता, पर्यटन, जैव विविधता, लोक संस्कृति और जल संसाधनों की दृष्टि से भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है।

इतिहास

उत्तराखंड का इतिहास

उत्तराखंड का इतिहास अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और विविधताओं से भरा हुआ है। इस क्षेत्र का उल्लेख पुराणों और महाभारत में केदारखंड (गढ़वाल) और मानसखंड (कुमाऊँ) के नाम से मिलता है।

प्राचीन काल

ऋग्वेद, महाभारत और पुराणों में इस हिमालयी क्षेत्र का विस्तृत वर्णन है। नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग और विष्णुप्रयाग जैसे संगम स्थल प्राचीन काल से ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे हैं। आदि शंकराचार्य ने चारों धामों की यात्रा की और केदारनाथ, बद्रीनाथ जैसे तीर्थों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कत्यूरी वंश ने इस क्षेत्र पर सदियों तक शासन किया और अनेक मंदिरों, बावड़ियों और प्रशासनिक केंद्रों का निर्माण किया।

मध्यकालीन काल

मध्यकाल में कुमाऊँ में चंद वंश और गढ़वाल में गढ़वाल राजवंश का शासन रहा। अजयपाल ने गढ़वाल के छोटे-छोटे गढ़ों को एकत्रित करके एक सशक्त गढ़वाल राज्य की स्थापना की। चंद शासकों ने कुमाऊँ में व्यापार, संस्कृति और मंदिर निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। इस काल में तिब्बत के साथ व्यापारिक संबंध भी विकसित हुए।

गोरखा शासन

18वीं शताब्दी के अंत में गोरखा शासकों ने कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों पर अधिकार जमा लिया। गोरखा शासन कठोर था और जनता को भारी कर-भार और बेगार प्रथा का सामना करना पड़ा। 1814-1815 के एंग्लो-नेपाल युद्ध में गोरखा सेना की पराजय हुई और सुगौली संधि के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया।

ब्रिटिश काल

ब्रिटिश शासनकाल में नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, लैंसडाउन, अल्मोड़ा जैसे पर्वतीय नगरों का विकास हुआ। ग्रीष्मकालीन राजधानियां और सैनिक छावनियां स्थापित हुईं। सड़क निर्माण, शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तार हुआ। उत्तराखंड के वीरों ने प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में अभूतपूर्व साहस का प्रदर्शन किया। स्वतंत्रता आंदोलन में भी यह क्षेत्र सक्रिय रहा।

राज्य आंदोलन

स्वतंत्रता के बाद उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहा। पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए एक अलग पर्वतीय राज्य की माँग सदियों से उठती रही। 1994 में मुजफ्फरनगर की घटनाओं के बाद यह आंदोलन और तीव्र हो गया। छात्रों, महिलाओं और स्थानीय समुदायों ने बड़ी संख्या में इस आंदोलन में भाग लिया। अंततः 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल राज्य की स्थापना हुई। 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।

आधुनिक उत्तराखंड

राज्य गठन के बाद से उत्तराखंड ने पर्यटन, जलविद्युत, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेज़ी से विकास किया है। 2013 की केदारनाथ आपदा और कई अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता की परीक्षा ली। पलायन, पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा आज के प्रमुख मुद्दे हैं। राज्य सरकार और नागरिक समाज मिलकर सतत विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

राज्य प्रतीक

उत्तराखंड के राज्य प्रतीक एवं पहचान

उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान, राज्य चिह्न और महत्वपूर्ण तथ्य।

कस्तूरी मृग राज्य पशु
कस्तूरी मृग
मोस्कस क्राइसोगास्टर (वैज्ञानिक नाम)
हिमालयी कस्तूरी मृग अपनी दुर्लभ प्राकृतिक कस्तूरी के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यह 3,500-4,500 मीटर ऊंचाई पर पाया जाता है।
हिमालयी मोनाल राज्य पक्षी
हिमालयी मोनाल
लोफोफोरस इम्पेजानस (वैज्ञानिक नाम)
इंद्रधनुषी रंगों वाला यह सुंदर पक्षी उत्तराखंड की पहचान है। इसे स्थानीय भाषा में "मुनाल" भी कहते हैं।
ब्रह्मकमल राज्य पुष्प
ब्रह्मकमल
सॉसुरिया ओबवैलटा (वैज्ञानिक नाम)
ब्रह्मकमल एक दुर्लभ और पवित्र हिमालयी पुष्प है जो 4,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर खिलता है। यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
बुरांश राज्य वृक्ष
बुरांश
रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम (वैज्ञानिक नाम)
बसंत के आगमन पर लाल फूलों से लद जाने वाला बुरांश उत्तराखंड की पहाड़ियों की शोभा है। इसके फूलों से पौष्टिक शरबत बनाया जाता है।
देहरादून राज्य की राजधानी
देहरादून
देहरादून उत्तराखंड की शीतकालीन राजधानी है। यह दून घाटी में हिमालय की तलहटी में स्थित है।
गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी
गैरसैंण
गैरसैंण (भराड़ीसैंण) उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है, जो चमोली जिले में मध्य हिमालय में स्थित है।
नैनीताल उच्च न्यायालय
नैनीताल
उत्तराखंड का उच्च न्यायालय नैनीताल में स्थित है। इसकी स्थापना राज्य गठन के समय हुई थी।
देवभूमि राज्य का उपनाम
देवभूमि
देवभूमि — ईश्वर की भूमि। अनगिनत मंदिरों, तीर्थस्थलों और धार्मिक स्थानों के कारण उत्तराखंड को यह पवित्र नाम मिला है।
9 नवंबर 2000 स्थापना दिवस
9 नवंबर 2000
9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल नाम से राज्य की स्थापना हुई। 2007 में इसका नाम उत्तराखंड कर दिया गया।
भौगोलिक स्वरूप

उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप एवं प्राकृतिक विभाजन

उत्तराखंड मध्य हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जो हिमाच्छादित शिखरों, संकीर्ण घाटियों, सघन वनों और तराई-भाबर के मैदानों में बंटा है।

उच्च हिमालय (ग्रेटर हिमालय)

4,800 मीटर से 7,816 मीटर (नंदा देवी) तक की हिमाच्छादित चोटियां, विशाल हिमनद (गंगोत्री, पिंडारी, मिलम) और अल्पाइन बुग्याल। यह क्षेत्र भारत की प्रमुख नदियों का स्रोत है।

ऊंचाई: 4,800m+

मध्य हिमालय (लेसर हिमालय)

1,500 से 3,500 मीटर ऊंचाई वाला क्षेत्र जहां मसूरी, नैनीताल, रानीखेत और कौसानी जैसे प्रमुख हिल स्टेशन स्थित हैं। देवदार, बांज और बुरांश के घने वनों से आच्छादित।

ऊंचाई: 1,500 - 3,500m

शिवालिक एवं दून घाटियां

बाहरी हिमालय की कम ऊंचाई वाली पर्वतमालाएं (600–1,200 मी.) और उनके बीच स्थित समतल अनुदैर्ध्य घाटियां (जैसे देहरादून, क्यारदा दून)। यह उपजाऊ और घनी आबादी वाला क्षेत्र है।

ऊंचाई: 600 - 1,200m

भाबर एवं तराई क्षेत्र

शिवालिक के ठीक दक्षिण में कंकड़-पत्थरों से निर्मित भाबर और उसके नीचे अत्यधिक उपजाऊ, जल-समृद्ध तराई का मैदानी भाग (उधम सिंह नगर व हरिद्वार)। यह राज्य का कृषि व औद्योगिक केंद्र है।

मैदानी व कृषि भूभाग
28°43' N - 31°27' Nअक्षांशीय विस्तार
77°34' E - 81°02' Eदेशांतरीय विस्तार
86%पर्वतीय भूभाग
चीन व नेपालअंतर्राष्ट्रीय सीमाएं
प्रमुख नदियाँ

उत्तराखंड की पवित्र नदियां

उत्तराखंड भारत की सबसे महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम स्थल है। गंगा, यमुना, अलकनंदा, भागीरथी और अनेक पवित्र नदियां यहीं से निकलती हैं।

पर्वत और हिमनद

उत्तराखंड की पर्वत चोटियां और हिमनद

नंदा देवी, त्रिशूल, पंचाचूली और अनेक हिमालयी चोटियां उत्तराखंड की शान हैं। प्रमुख हिमनद यहां की नदियों का स्रोत हैं।

नंदा देवी
नंदा देवी
चमोली जिला
उत्तराखंड की सर्वोच्च चोटी और भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और बायोस्फीयर रिजर्व के केंद्र में स्थित।
त्रिशूल
त्रिशूल
चमोली जिला
त्रिशूल तीन शिखरों का एक समूह है। भगवान शिव के त्रिशूल से समानता के कारण इसका यह नाम पड़ा।
चौखंबा
चौखंबा
चमोली जिला
चौखंबा गंगोत्री हिमालय में चार शिखरों का समूह है। बद्रीनाथ से इसका विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
पंचाचूली
पंचाचूली
पिथौरागढ़ जिला
पांच चोटियों का समूह, जिसे पांडवों के स्वर्गारोहण से जोड़ा जाता है। मुनस्यारी से इसका सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
गंगोत्री हिमनद
गंगोत्री हिमनद
उत्तरकाशी जिला
भागीरथी नदी का उद्गम स्थल। यह एक प्रमुख हिमालयी हिमनद है और गंगोत्री धाम के पास स्थित है।
पिंडारी हिमनद
पिंडारी हिमनद
बागेश्वर जिला
पिंडारी ग्लेशियर ट्रेकिंग उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय ट्रेकों में से एक है। पिंडर नदी यहीं से निकलती है।
मिलम हिमनद
मिलम हिमनद
पिथौरागढ़ जिला
गोरी गंगा का उद्गम स्थल। मुनस्यारी से शुरू होने वाला मिलम ग्लेशियर ट्रेक दुर्गम और अद्भुत है।
सुंदरढूंगा हिमनद
सुंदरढूंगा हिमनद
बागेश्वर जिला
"सुंदर पत्थर" के अर्थ वाला यह ग्लेशियर बागेश्वर जिले में स्थित है और अत्यंत रमणीय है।
नंदा देवी
नंदा देवी
चमोली जिला
उत्तराखंड की सर्वोच्च चोटी और भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान और बायोस्फीयर रिजर्व के केंद्र में स्थित।
त्रिशूल
त्रिशूल
चमोली जिला
त्रिशूल तीन शिखरों का एक समूह है। भगवान शिव के त्रिशूल से समानता के कारण इसका यह नाम पड़ा।
चौखंबा
चौखंबा
चमोली जिला
चौखंबा गंगोत्री हिमालय में चार शिखरों का समूह है। बद्रीनाथ से इसका विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
पंचाचूली
पंचाचूली
पिथौरागढ़ जिला
पांच चोटियों का समूह, जिसे पांडवों के स्वर्गारोहण से जोड़ा जाता है। मुनस्यारी से इसका सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
गंगोत्री हिमनद
गंगोत्री हिमनद
उत्तरकाशी जिला
भागीरथी नदी का उद्गम स्थल। यह एक प्रमुख हिमालयी हिमनद है और गंगोत्री धाम के पास स्थित है।
पिंडारी हिमनद
पिंडारी हिमनद
बागेश्वर जिला
पिंडारी ग्लेशियर ट्रेकिंग उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय ट्रेकों में से एक है। पिंडर नदी यहीं से निकलती है।
मिलम हिमनद
मिलम हिमनद
पिथौरागढ़ जिला
गोरी गंगा का उद्गम स्थल। मुनस्यारी से शुरू होने वाला मिलम ग्लेशियर ट्रेक दुर्गम और अद्भुत है।
सुंदरढूंगा हिमनद
सुंदरढूंगा हिमनद
बागेश्वर जिला
"सुंदर पत्थर" के अर्थ वाला यह ग्लेशियर बागेश्वर जिले में स्थित है और अत्यंत रमणीय है।
संस्कृति और परंपराएँ

उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति

लोकनृत्य, लोकगीत, मेले, पारंपरिक वेशभूषा और स्वादिष्ट व्यंजनों की विविधता उत्तराखंड को अनूठा बनाती है।

लोकनृत्य
लोकनृत्य
छोलिया, झोड़ा, चाँचरी, लांगवीर, थड्या और झुमैलो जैसे लोकनृत्य उत्तराखंड की जीवंत लोक परंपरा के अभिन्न हिस्से हैं।
पारंपरिक वेशभूषा
पारंपरिक वेशभूषा
गढ़वाली और कुमाऊँनी महिलाओं की रंगीन पिछौड़ा, घाघरा और आभूषण परंपरा विशेष है। पुरुष धोती-कुर्ता और टोपी पहनते हैं।
स्थानीय भोजन
स्थानीय भोजन
आलू के गुटके, कापा, झंगोरे की खीर, मंडुवे की रोटी, बाल मिठाई, अरसा और पहाड़ी दाल-भात उत्तराखंड के प्रसिद्ध व्यंजन हैं।
मेले और उत्सव
मेले और उत्सव
उत्तरायणी, नंदा देवी मेला, हरेला, बसंत पंचमी, देवीधुरा मेला और गेंद मेला उत्तराखंड के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव हैं।
हस्तशिल्प
हस्तशिल्प
रिंगाल (बांस) शिल्प, ऊनी वस्त्र, ताम्र शिल्प, काष्ठ कला और थापा-लिखाई उत्तराखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक कलाएं हैं।
जागर और लोकगीत
जागर और लोकगीत
जागर एक प्राचीन लोकगायन परंपरा है जिसमें देवी-देवताओं और वीरों की गाथाएं गाई जाती हैं। यह एक अनूठी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है।
वन्यजीव

राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य

उत्तराखंड जैव विविधता का खजाना है। जिम कॉर्बेट, नंदा देवी और फूलों की घाटी जैसे यूनेस्को धरोहर स्थल यहां हैं।

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

नैनीताल
भारत का सबसे पहला और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय उद्यान। बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, तेंदुआ और विविध पक्षी प्रजातियों का विश्व प्रसिद्ध प्राकृतिक आवास।
बाघ, हाथी, तेंदुआ, घड़ियाल
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राजाजी राष्ट्रीय उद्यान उद्यान

राजाजी राष्ट्रीय उद्यान

हरिद्वार
शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में 820 वर्ग किमी में फैला यह उद्यान एशियाई हाथियों, बाघों और चीतलों का प्राकृतिक आवास है।
एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुआ, चीतल
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फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान उद्यान

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान

चमोली
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। मानसून में खिलने वाले 500 से अधिक दुर्लभ जंगली फूलों की जादुई अल्पाइन घाटी।
500+ पुष्प प्रजातियां, हिमालयी मोनाल, कस्तूरी मृग
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नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान उद्यान

नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान

चमोली
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। 7,816 मीटर ऊंची नंदा देवी चोटी की गोद में फैला अत्यंत सुरक्षित उच्च-हिमालयी बायोस्फीयर रिजर्व।
हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भरल, भूरा भालू
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केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य उद्यान

केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य

रुद्रप्रयाग
मंदाकिनी और अलकनंदा घाटियों में 975 वर्ग किमी में फैला उच्च हिमालयी अभयारण्य, जो कस्तूरी मृग संरक्षण के लिए जाना जाता है।
हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, मोनाल, भरल
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देहरादून चिड़ियाघर (मालसी डियर पार्क) उद्यान

देहरादून चिड़ियाघर (मालसी डियर पार्क)

देहरादून
शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित सुंदर प्राणी उद्यान जहां हिरण, पक्षी, तेंदुए और प्राकृतिक वनस्पति आकर्षण का केंद्र हैं।
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गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान उद्यान

गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान

उत्तरकाशी
उत्तरकाशी की टोंस घाटी में 958 वर्ग किमी में फैला राष्ट्रीय उद्यान जो स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट का प्रमुख केंद्र है।
हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भरल, भूरा भालू
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अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य उद्यान

अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य

पिथौरागढ़
काली नदी घाटी के पास 600 वर्ग किमी में फैला अभयारण्य जो कस्तूरी मृग के संरक्षण हेतु विशेष रूप से स्थापित हुआ था।
कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, भरल, हिमालयी भालू
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धार्मिक और पर्यटन स्थल

तीर्थस्थल और पर्यटन

चार धाम से लेकर हिल स्टेशनों तक — उत्तराखंड में हर श्रद्धालु, पर्यटक और साहसी के लिए कुछ खास है।

नैनी झील

नैनी झील

नैनीताल
नैनीताल के केंद्र में स्थित प्रसिद्ध प्राकृतिक झील, जहां बोटिंग, नौकायन और चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियों का मनोरम दृश्य मिलता है।
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काठगोदाम रेलवे स्टेशन

काठगोदाम रेलवे स्टेशन

नैनीताल
कुमाऊं क्षेत्र का अंतिम ब्रॉडगेज टर्मिनल और नैनीताल जिले का मुख्य प्रवेश द्वार।
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मुक्तेश्वर धाम

मुक्तेश्वर धाम

नैनीताल
2286 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शांत पर्वतीय स्थल, जहां 350 वर्ष पुराना मुक्तेश्वर शिव मंदिर और चौली की जाली प्रसिद्ध है।
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औली

औली

चमोली
भारत का नंबर 1 स्कीइंग गंतव्य। एशिया का सबसे लंबा केबल कार मार्ग और नंदा देवी का 180-डिग्री भव्य दृश्य।
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देवरिया ताल

देवरिया ताल

रुद्रप्रयाग
चौखम्बा और हिमालयी शिखरों की जादुई परछाई दिखाने वाली 2438 मीटर पर स्थित शांत प्राकृतिक झील।
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मसूरी

मसूरी

देहरादून
पहाड़ों की रानी। केम्पटी फॉल, गन हिल, मॉल रोड और लाल टिब्बा के साथ दून घाटी का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करने वाला विख्यात पर्वतीय स्थल।
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रॉबर्स केव (गुच्चूपानी)

रॉबर्स केव (गुच्चूपानी)

देहरादून
प्राकृतिक चूना पत्थर की ठंडी गुफा जिसके भीतर शीतल जल की धारा बहती है। पर्यटकों का पसंदीदा पिकनिक स्थल।
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सहस्रधारा

सहस्रधारा

देहरादून
हजारों धाराओं वाला सल्फर युक्त प्राकृतिक जलप्रपात और गुफाएं, जो औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं।
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वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई)

वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई)

देहरादून
ग्रीको-रोमन स्थापत्य शैली में निर्मित भारत का प्रमुख वानिकी संस्थान और भव्य ऐतिहासिक धरोहर।
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लच्छीवाला नेचर पार्क

लच्छीवाला नेचर पार्क

देहरादून
सोंग नदी के किनारे हरी-भरी वादियों में स्थित सुंदर पिकनिक और नेचर पार्क, जहां शीतल प्राकृतिक जल कुंड पर्यटकों को लुभाते हैं।
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घंटाघर (क्लॉक टॉवर)

घंटाघर (क्लॉक टॉवर)

देहरादून
देहरादून के केंद्र में स्थित 6 भुजाओं वाला ऐतिहासिक घंटाघर, जो शहर का सबसे प्रसिद्ध पहचान चिह्न और हृदय स्थल है।
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रानीखेत

रानीखेत

अल्मोड़ा
शांत पर्वतीय छावनी। चौबटिया सेब के बाग, झूला देवी मंदिर, गोल्फ मैदान और हिमालय की चोटियों का विहंगम दृश्य।
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दयारा बुग्याल

दयारा बुग्याल

उत्तरकाशी
3400 मीटर की ऊंचाई पर फैले मखमली घास के विशाल अल्पाइन मैदान जो ट्रेकिंग और स्कीइंग के लिए जाने जाते हैं।
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मुनस्यारी

मुनस्यारी

पिथौरागढ़
पंचाचूली शिखरों की गोद में बसा रमणीक पर्वतीय स्थल जिसे "छोटा कश्मीर" कहा जाता है। मिलम और रालम ग्लेशियर का आधार शिविर।
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चांडक हिल्स

चांडक हिल्स

पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ और सोर घाटी का विहंगम नजारा प्रस्तुत करने वाली सुरम्य पहाड़ी शृंखला।
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टिहरी बांध एवं झील

टिहरी बांध एवं झील

टिहरी गढ़वाल
भारत का सबसे ऊंचा बांध और 42 वर्ग किमी में फैली विशाल झील, जहां स्पीड बोटिंग, जेट स्कीइंग और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जाता है।
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धनोल्टी इको पार्क

धनोल्टी इको पार्क

टिहरी गढ़वाल
देवदार और बांज के विशाल वृक्षों के बीच स्थित शांत और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण पार्क।
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खिर्सू

खिर्सू

पौड़ी गढ़वाल
1700 मीटर की ऊंचाई पर बांज और देवदार के वनों से घिरा शांत हिल स्टेशन जहां से हिमालय का विस्तृत मनोरम दृश्य दिखता है।
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चौखम्बा व्यू पॉइंट

चौखम्बा व्यू पॉइंट

पौड़ी गढ़वाल
पौड़ी से चौखम्बा शिखर के विहंगम दृश्य प्रस्तुत करने वाला प्रमुख स्थल।
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ऐबट माउंट

ऐबट माउंट

चंपावत
7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित शांत ब्रिटिशकालीन सुरम्य पर्वतीय स्थल जहां से हिमालय की बर्फानी चोटियां दिखती हैं।
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कौसानी

कौसानी

बागेश्वर
महात्मा गांधी द्वारा "भारत का स्विट्जरलैंड" कहा गया रमणीक हिल स्टेशन जहां से 300 किमी चौड़ा हिमालयी दृश्य (त्रिशूल, नंदादेवी) दिखाई देता है।
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पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक

पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक

बागेश्वर
पिंडर नदी का उद्गम स्थल। उत्तराखंड का विश्व प्रसिद्ध, रोमांचक और सबसे सुगम हिमालयी ग्लेशियर ट्रेक।
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गिरी ताल (काशीपुर)

गिरी ताल (काशीपुर)

ऊधम सिंह नगर
काशीपुर के निकट शांत प्राकृतिक झील और पिकनिक स्थल।
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नैना देवी मंदिर

नैना देवी मंदिर

नैनीताल
नैनी झील के उत्तरी किनारे पर स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक पौराणिक मंदिर। मान्यता है कि यहां देवी सती के नयन गिरे थे।
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कैंची धाम

कैंची धाम

नैनीताल
नीम करोली बाबा का पावन आश्रम। भवाली के निकट स्थित, देश-विदेश के श्रद्धालुओं का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र।
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हर की पैड़ी

हर की पैड़ी

हरिद्वार
गंगा का सबसे पवित्र घाट। संध्या गंगा आरती के समय सहस्र दीपों की आभा और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का अलौकिक केंद्र।
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मनसा देवी मंदिर

मनसा देवी मंदिर

हरिद्वार
बिल्व पर्वत पर स्थित मनोकामना पूर्ण करने वाली मां मनसा देवी का प्रसिद्ध मंदिर, जहां रोपवे या पैदल मार्ग से पहुंचा जाता है।
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चंडी देवी मंदिर

चंडी देवी मंदिर

हरिद्वार
नील पर्वत पर स्थित मां चंडी का पौराणिक शक्तिपीठ। मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में यहां मूर्ति स्थापित की थी।
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भारत माता मंदिर

भारत माता मंदिर

हरिद्वार
भारत की एकता और सांस्कृतिक विविधता को समर्पित 8 मंजिला अनूठा मंदिर।
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शांतिकुंज

शांतिकुंज

हरिद्वार
अखिल विश्व गायत्री परिवार का वैश्विक मुख्यालय और आध्यात्मिक साधना तथा समाज सेवा का प्रमुख केंद्र।
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हेमकुंड साहिब

हेमकुंड साहिब

चमोली
4,329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 7 बर्फानी शिखरों और पवित्र अमृत सरोवर से घिरा सिखों का सर्वोच्च पवित्र धाम।
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तुंगनाथ एवं चंद्रशिला

तुंगनाथ एवं चंद्रशिला

रुद्रप्रयाग
विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर (3,680 मीटर) तथा ऊपर स्थित चंद्रशिला शिखर, जहां से संपूर्ण गढ़वाल हिमालय दिखाई देता है।
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रुद्रप्रयाग संगम

रुद्रप्रयाग संगम

रुद्रप्रयाग
अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का पावन संगम जहां नारद मुनि ने संगीत साधना की थी।
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ऋषिकेश

ऋषिकेश

देहरादून
योग और आध्यात्म की विश्व राजधानी। गंगा आरती, त्रिवेणी घाट, राम झूला, लक्ष्मण झूला और रिवर राफ्टिंग का प्रमुख केंद्र।
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टपकेश्वर महादेव मंदिर

टपकेश्वर महादेव मंदिर

देहरादून
आसन नदी के तट पर प्राकृतिक गुफा में स्थित प्राचीन शिव मंदिर जहां शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से जल टपकता है।
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माइंड्रोलिंग बौद्ध मठ

माइंड्रोलिंग बौद्ध मठ

देहरादून
क्लेमेंट टाउन में स्थित भारत के सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक, जो अपने 185 फीट ऊंचे भव्य स्तूप और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
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संतला देवी मंदिर

संतला देवी मंदिर

देहरादून
नून नदी के ऊपर पहाड़ी पर स्थित प्राचीन मंदिर जो स्थानीय श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और सुंदर ट्रैकिंग मार्ग के लिए जाना जाता है।
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जागेश्वर धाम

जागेश्वर धाम

अल्मोड़ा
देवदार के घने जंगलों में स्थित 125 से अधिक प्राचीन पत्थरों से निर्मित शिव मंदिरों का अनूठा समूह। 8वीं-12वीं शताब्दी की कत्यूरी कला।
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कसार देवी मंदिर

कसार देवी मंदिर

अल्मोड़ा
क्रैंक रिज पर स्थित विश्व प्रसिद्ध मंदिर, जो वैन एलन विकिरण पेटी की भू-चुंबकीय शांति के लिए प्रसिद्ध है।
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चितई गोलू देवता मंदिर

चितई गोलू देवता मंदिर

अल्मोड़ा
न्याय के देवता श्री गोलू देवता का प्रसिद्ध मंदिर जहां भक्त मनोकामनाओं के लिए घंटियां और अर्जियां चढ़ाते हैं।
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विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी

विश्वनाथ मंदिर उत्तरकाशी

उत्तरकाशी
भगवान शिव का प्राचीन मंदिर जहां विशाल तांबे का शक्ति त्रिशूल स्थापित है।
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पाताल भुवनेश्वर गुफा

पाताल भुवनेश्वर गुफा

पिथौरागढ़
भूमिगत रहस्यमयी चूना पत्थर की गुफा मंदिर जहां 33 कोटि देवी-देवताओं की प्राकृतिक पत्थर आकृतियां विद्यमान हैं।
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सुरकंडा देवी मंदिर

सुरकंडा देवी मंदिर

टिहरी गढ़वाल
2757 मीटर की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ, जहां से हिमालयी चोटियों का 360-डिग्री भव्य दृश्य दिखाई देता है।
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देवप्रयाग संगम

देवप्रयाग संगम

टिहरी गढ़वाल
भागीरथी और अलकनंदा नदियों का पवित्र संगम स्थल जहां से पवित्र गंगा नदी का औपचारिक जन्म होता है।
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कंडोलिया मंदिर

कंडोलिया मंदिर

पौड़ी गढ़वाल
पौड़ी शहर के रक्षक देवता कंडोलिया को समर्पित मंदिर जो देवदार के जंगलों से घिरा हुआ है।
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पूर्णागिरि

पूर्णागिरि

चंपावत
108 शक्तिपीठों में से एक। काली नदी के ऊपर अन्नपूर्णा शिखर पर स्थित माँ पूर्णागिरि का पवित्र मंदिर जहां प्रतिवर्ष विशाल मेला लगता है।
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बालेश्वर मंदिर

बालेश्वर मंदिर

चंपावत
चंद शासकों द्वारा निर्मित 10वीं-12वीं शताब्दी का नक्काशीदार पाषाण मंदिर जो उत्कृष्ट वास्तुशिल्प का प्रतीक है।
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बाबा बागनाथ मंदिर

बाबा बागनाथ मंदिर

बागेश्वर
सरयू और गोमती नदियों के पावन संगम पर स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर जहां हर वर्ष उत्तरायणी मेले का भव्य आयोजन होता है।
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नानकमत्ता साहिब

नानकमत्ता साहिब

ऊधम सिंह नगर
सिखों का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध पवित्र तीर्थ स्थल। देवहा नदी के किनारे गुरु नानक देव जी की पावन स्मृति से जुड़ा गुरुद्वारा व विशाल जलाशय।
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अटारिया मंदिर (रुद्रपुर)

अटारिया मंदिर (रुद्रपुर)

ऊधम सिंह नगर
मां अटारिया को समर्पित पौराणिक मंदिर, जहां चैत्र नवरात्रों में विशाल 10-दिवसीय मेला आयोजित होता है।
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बद्रीनाथ चार धाम

बद्रीनाथ

चमोली
चारधामों में सर्वोच्च भगवान विष्णु को समर्पित पावन धाम। अलकनंदा नदी के तट पर नर-नारायण पर्वतों के बीच स्थित सनातन तीर्थ।
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केदारनाथ चार धाम

केदारनाथ

रुद्रप्रयाग
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च श्री केदारनाथ धाम। मंदाकिनी नदी के तट पर 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवाधिदेव महादेव का धाम।
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गंगोत्री चार धाम

गंगोत्री

उत्तरकाशी
मां गंगा का पावन धाम जो भागीरथी नदी के तट पर 3,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चारधाम यात्रा का पावन पड़ाव।
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यमुनोत्री चार धाम

यमुनोत्री

उत्तरकाशी
यमुना नदी का पवित्र उद्गम स्थल और चारधाम यात्रा का प्रथम पड़ाव। सूर्य कुंड और दिव्य शिला के दर्शन।
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अर्थव्यवस्था

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और स्थानीय उत्पाद

आर्थिक परिदृश्य एवं मुख्य क्षेत्र

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था मुख्यतः पर्यटन, कृषि, जलविद्युत और वन-आधारित उद्योगों पर निर्भर है। चारधाम यात्रा और हिमालयी पर्यटन से राज्य को सालाना करोड़ों रुपये की आय होती है।

पर्वतीय कृषि में मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, राजमा और आलू की खेती प्रमुख है। सेब, आड़ू, खुबानी और नाशपाती जैसे बागवानी फल भी महत्वपूर्ण हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं।

जड़ी-बूटी संग्रह, ऊनी वस्त्र, रिंगाल शिल्प और स्थानीय हस्तशिल्प ग्रामीण आजीविका के प्रमुख साधन हैं। महिला स्वसहायता समूह स्थानीय उत्पादों के उत्पादन और विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

टिहरी, श्रीनगर और कई जलविद्युत परियोजनाएं राज्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं। देहरादून और हरिद्वार में आईटी और फार्मा उद्योग भी विकसित हो रहे हैं।

पर्यटन एवं चारधाम
तीर्थाटन, साहसिक पर्यटन व होमस्टे आजीविका
जलविद्युत ऊर्जा
टिहरी व अन्य प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं
जैविक पर्वतीय कृषि
मंडुवा, झंगोरा, राजमा व हिमालयी फल बागवानी
उद्योग एवं फार्मा
सिडकुल हरिद्वार, पंतनगर, सेलाकुई व आईटी

प्रमुख स्थानीय उत्पाद

मंडुवा
मंडुवा
पोषण से भरपूर पहाड़ी अनाज। रोटी, बिस्किट और लड्डू बनाने के लिए उपयोगी।
बाल मिठाई
बाल मिठाई
अल्मोड़ा की विश्वप्रसिद्ध मिठाई। खोया और चॉकलेट से बनी, सफेद चीनी की गोलियों से सजी।
बुरांश शरबत
बुरांश शरबत
लाल बुरांश फूलों से बना प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक पेय। हृदय और रक्तचाप के लिए लाभकारी।
रिंगाल उत्पाद
रिंगाल उत्पाद
पहाड़ी बांस (रिंगाल) से बनी टोकरियां, चटाइयां और सजावटी वस्तुएं।
ऊनी वस्त्र
ऊनी वस्त्र
हाथ से बुने हुए ऊनी शॉल, जुराबें, स्वेटर और दरियां। पहाड़ी ठंड से बचाने वाले पारंपरिक वस्त्र।
पहाड़ी शहद
पहाड़ी शहद
जंगली फूलों का प्राकृतिक शहद। पोषण से भरपूर, जड़ी-बूटियों के गुणों से समृद्ध।
13 जिले

उत्तराखंड के 13 जिले

दो मंडलों — गढ़वाल और कुमाऊँ — में विभाजित उत्तराखंड के सभी 13 जिलों की जानकारी।

अल्मोड़ा कुमाऊँ
अल्मोड़ा
कुमाऊँ की सांस्कृतिक राजधानी। जागेश्वर, कसार देवी, रानीखेत।
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उत्तरकाशी गढ़वाल
उत्तरकाशी
गंगोत्री, यमुनोत्री, हर्षिल — देवताओं की भूमि।
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ऊधम सिंह नगर कुमाऊँ
ऊधम सिंह नगर
तराई का समृद्ध औद्योगिक जिला। काशीपुर, रुद्रपुर, खटीमा।
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चंपावत कुमाऊँ
चंपावत
कुमाऊँ का प्रथम राजधानी स्थल। पूर्णागिरि, बाणासुर किला।
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चमोली गढ़वाल
चमोली
बद्रीनाथ, फूलों की घाटी, औली, हेमकुंड साहिब।
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टिहरी गढ़वाल गढ़वाल
टिहरी गढ़वाल
नई टिहरी, देवप्रयाग, टिहरी बांध की भव्य झील।
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देहरादून गढ़वाल
देहरादून
दून घाटी का खूबसूरत शहर — राज्य की राजधानी। मसूरी, ऋषिकेश, प्रमुख संस्थान।
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नैनीताल कुमाऊँ
नैनीताल
झीलों का शहर। नैनी झील, नैना देवी मंदिर, कॉर्बेट पार्क।
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पिथौरागढ़ कुमाऊँ
पिथौरागढ़
छोटा कश्मीर। मुनस्यारी, पंचाचूली, मिलम ग्लेशियर।
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पौड़ी गढ़वाल गढ़वाल
पौड़ी गढ़वाल
गढ़वाल का हृदय। खिर्सू, ताड़केश्वर, दूधातोली की हरी पहाड़ियां।
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बागेश्वर कुमाऊँ
बागेश्वर
सरयू-गोमती संगम। बागनाथ मंदिर, कौसानी, पिंडारी ग्लेशियर।
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रुद्रप्रयाग गढ़वाल
रुद्रप्रयाग
केदारनाथ, तुंगनाथ, उखीमठ — पांच प्रयागों का संगम।
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हरिद्वार गढ़वाल
हरिद्वार
गंगा का प्रवेश द्वार। कुंभ मेला, हर की पैड़ी, मंसा देवी मंदिर।
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