उत्तराखंड

नैनीताल दुर्गा महोत्सव में कुमाऊनी-बंगाली संस्कृति का भव्य संगम, मां के जयकारों से गूंजा सरोवर नगरी

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में 70वें दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां दुर्गा के जयकारों और धार्मिक उत्साह के बीच निकली इस यात्रा...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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21 अक्टूबर 2026, 05:28 पूर्वाह्न 2 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 3 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 49 minutes पहले

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में 70वें दुर्गा पूजा महोत्सव के अंतिम दिन भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मां दुर्गा के जयकारों और धार्मिक उत्साह के बीच निकली इस यात्रा में कुमाऊनी और बंगाली संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक अनुष्ठानों और आकर्षक झांकियों ने महोत्सव की रौनक बढ़ाई।

शहर की सर्बजनिन दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से आयोजित इस महोत्सव का समापन मंगलवार देर शाम नैनी झील में मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ होना निर्धारित था। इस दौरान श्रद्धालुओं में मां को विदाई देने के साथ अगले वर्ष फिर से आगमन की कामना को लेकर विशेष भावुकता देखने को मिली।

महादशमी पूजा के साथ शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान

महोत्सव के अंतिम दिन नयना देवी मंदिर परिसर में स्थापित मां दुर्गा के मंडप के समीप महादशमी पूजा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद दर्पण विसर्जन और देवी वरण की रस्में संपन्न की गईं।

इसके बाद सिंदूर खेल की पारंपरिक रस्म और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों ने आयोजन को विशेष बना दिया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।

शोभायात्रा में दिखी कुमाऊनी और बंगाली परंपराओं की झलक

मां दुर्गा की विदाई के लिए निकाली गई शोभायात्रा में स्थानीय कुमाऊनी परंपराओं और बंगाली संस्कृति का सुंदर मेल देखने को मिला। मां के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु उत्साह के साथ शामिल हुए। आकर्षक झांकियों और पारंपरिक धार्मिक रस्मों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

70 वर्षों से आयोजित हो रहा यह दुर्गा पूजा महोत्सव नैनीताल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह आयोजन विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने के साथ आपसी सद्भाव और सामुदायिक एकता का संदेश भी देता है।

नैनी झील में प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा समापन

महोत्सव के अंतिम चरण में मां दुर्गा की प्रतिमा का नैनी झील में विसर्जन किया जाना था। इसके साथ ही कई दिनों से चल रहे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का समापन होगा। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां को विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।

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