काशीपुर का ऐतिहासिक चैती मेला इस वर्ष 2026 में अपनी भव्यता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। चैत्र मास के आगमन के साथ ही कुमाऊं और तराई के द्वार कहे जाने वाले काशीपुर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह मेला केवल एक व्यापारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। मां बाल सुंदरी देवी के मंदिर में इस बार रिकॉर्ड तोड़ भीड़ देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण उत्तराखंड सरकार की ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ है।
आध्यात्मिक महत्व और पौराणिक कथा: मां बाल सुंदरी का यह मंदिर पांडव कालीन माना जाता है। मान्यता है कि यहां देवी सती का दाहिना अंग गिरा था। इस वर्ष मेले की सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं में आमूल-चूल परिवर्तन किए गए हैं। प्रशासन ने पहली बार ‘फेस रिकग्निशन’ कैमरों का इस्तेमाल किया है ताकि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मेले में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, और पंजाब से भी भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।
मानसखंड कॉरिडोर का प्रभाव: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में घोषणा की कि काशीपुर के चैती मंदिर को मानसखंड कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, पार्किंग सुविधाओं का विस्तार और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक विश्राम गृहों का निर्माण किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय छोटे व्यापारियों, हस्तशिल्पकारों और रेहड़ी-पटरी वालों की आय में भी जबरदस्त वृद्धि देखी गई है। मेले के मैदान में लगने वाले झूलों, हलवा-पराठे की दुकानों और कृषि उपकरणों की प्रदर्शनी इस बार डिजिटल पेमेंट (UPI) से लैस है, जो ‘डिजिटल इंडिया’ की झलक पेश करती है।







