उत्तराखंड

कोसी नदी पर पहली बार आयोजित हुई महाआरती, सीएम धामी बोले- नदियां सभ्यता और संस्कृति की जीवन रेखा

रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर तट पर हुआ महाआरती का शुभारंभ, मुख्यमंत्री ने वर्चुअली जुड़कर नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर दिया जोर...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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12 अक्टूबर 2026, 06:24 पूर्वाह्न 2 व्यूज 5 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
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रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 4 minutes पहले

रामनगर के गिरिजा देवी मंदिर तट पर हुआ महाआरती का शुभारंभ, मुख्यमंत्री ने वर्चुअली जुड़कर नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर दिया जोर

रामनगर (नैनीताल)। उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने की दिशा में रामनगर में कोसी नदी के तट पर पहली बार महाआरती का आयोजन किया गया। गिरिजा देवी मंदिर के समीप कोसी नदी तट पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअली संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नदियों को सभ्यता, संस्कृति और जनजीवन की जीवन रेखा बताते हुए उनके संरक्षण तथा स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान यहां की आस्था, आध्यात्मिक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। प्रदेश की नदियां केवल जल का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे यहां के सामाजिक जीवन, धार्मिक विश्वासों और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नदियों के किनारे विकसित हुई परंपराएं पीढ़ियों से लोगों को प्रकृति और आध्यात्मिकता से जोड़ती रही हैं।

मां कोसी और मां गिरिजा देवी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

सीएम धामी ने मां कोसी के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि नदी का उत्तराखंड के जनजीवन में विशेष स्थान है। वहीं, मां गिरिजा देवी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं को समृद्ध बनाती है।

रामनगर स्थित गिरिजा देवी मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के समीप कोसी नदी तट पर महाआरती का आयोजन धार्मिक आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान को एक साथ जोड़ने वाला प्रयास है।

पहली बार आयोजित इस महाआरती के माध्यम से कोसी नदी के धार्मिक महत्व को सामने लाने के साथ ही क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को नई पहचान देने का प्रयास किया गया।

नदियों का संरक्षण और स्वच्छता जरूरी

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नदियों को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदियों का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और जनजीवन के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रदूषण पर नियंत्रण, कचरे का उचित निस्तारण और नदी तटों की साफ-सफाई जैसे प्रयास आवश्यक हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचाने से नदियों के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

कोसी नदी रामनगर और आसपास के क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक संसाधन के रूप में भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में नदी के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और संबंधित संस्थाओं की सहभागिता अहम मानी जाती है।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

कोसी नदी तट पर महाआरती का आयोजन क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रामनगर पहले से ही गिरिजा देवी मंदिर और आसपास के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के कारण पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है।

धार्मिक आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना रहती है।

मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और नदियों के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।

आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश

कोसी नदी तट पर पहली बार आयोजित महाआरती ने धार्मिक आस्था के साथ नदी संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को भी रेखांकित किया। गिरिजा देवी मंदिर के समीप हुए इस आयोजन के जरिए क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और कोसी नदी के प्रति लोगों का जुड़ाव मजबूत करने का संदेश दिया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने वर्चुअल संबोधन में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की नदियां प्रदेश की सभ्यता, संस्कृति और जनजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उनका संरक्षण करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए उन्हें स्वच्छ बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

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