कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने पवित्र मानसरोवर झील में डुबकी न लगा पाने पर गहरी निराशा जताई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव की पावन भूमि तक पहुंचने के बावजूद मानसरोवर में आस्था की डुबकी न लगा पाने का मलाल जीवनभर रहेगा।
2018 से लागू है प्रतिबंध
श्रद्धालुओं के अनुसार, वर्ष 2018 के बाद चीन ने मानसरोवर झील में सीधे स्नान और डुबकी लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद से यात्रियों को झील से बाल्टियों में पानी भरकर स्नान करने की अनुमति दी जाती है।
यात्रियों का कहना है कि झील के जल को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने इस फैसले को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से उचित बताया, लेकिन धार्मिक आस्था के अनुरूप मानसरोवर में डुबकी न लगा पाने का दुख भी व्यक्त किया।
आस्था का सबसे बड़ा केंद्र
कैलाश मानसरोवर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के पवित्र धाम के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु पहले कैलाश पर्वत की परिक्रमा करते हैं और उसके बाद मानसरोवर झील के पवित्र जल से स्नान कर पूजा-अर्चना करने की परंपरा निभाते हैं। हालांकि, वर्तमान प्रतिबंध के कारण श्रद्धालुओं को केवल बाल्टी में भरे जल से स्नान कर अपनी धार्मिक परंपरा पूरी करनी पड़ रही है।
श्रद्धालुओं ने जताई भावना
यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने कहा कि भगवान शिव के धाम तक पहुंचना उनके जीवन का सौभाग्य रहा, लेकिन मानसरोवर में पवित्र डुबकी न लगा पाने की कमी हमेशा महसूस होगी। उनका मानना है कि यह अनुभव अधूरा रह गया, जिसे वे जीवनभर याद रखेंगे।







