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मायावती ने अंबेडकरनगर से पुराने संबंधों की वजह से दो बार जीत हासिल की और अंतर बढ़ा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में यहां लोकसभा चुनाव जीत की हैट्रिक लगाई है। तब सीट अकबरपुर कहलाती थी। विशेष बात यह है कि उन्होंने लगातार तीन...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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5 अप्रैल 2024, 07:28 पूर्वाह्न 1 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
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रिपोर्टर Uttarakhand Ekta
अपडेट किया गया 3 years पहले

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में यहां लोकसभा चुनाव जीत की हैट्रिक लगाई है। तब सीट अकबरपुर कहलाती थी। विशेष बात यह है कि उन्होंने लगातार तीन बार जीत हासिल की और हर बार जीत का अंतर भी बढ़ाया।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का अंबेडकरनगर से गहरा संबंध है। इसकी शुरुआत हुई जब उन्होंने अपनी पहली बार मुख्यमंत्री बनते ही 29 सितंबर 1995 को फैजाबाद (अब अयोध्या) को अलग कर नए जिले का नाम अंबेडकरनगर रखा। इसके लिए वह अकबरपुर खुद आई थीं। शिवबाबा मैदान पर हुई रैली में ही डीएम और एसपी को जनता से पहले परिचय कराया। इसके बाद, मुख्यमंत्री के हर कार्यकाल में, उन्होंने जिले को महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं दीं।

इस जिले को भी बसपा ने अपना राजनीतिक केंद्र बनाया। 1998 के आम चुनाव में उन्होंने यहां से लड़ने का ऐलान किया था, जिससे विवाद हुआ था। हालाँकि तब भी बहुत से लोगों ने सोचा था कि मायावती अंत तक नहीं आएगी, लेकिन वह नामांकन शुरू होते ही अकबरपुर की सुरक्षित संसदीय सीट से बतौर प्रत्याशी परचा भर दी।

भाजपा और सपा ने स्थानीय प्रत्याशियों पर दांव लगाकर पूरी तरह से प्रतिस्पर्धा की। नतीजतन, भारी मतभेद के बावजूद मायावती सिर्फ 25,179 मतों से जीत सकीं। 2,63,561 मतदाताओं ने उनका समर्थन किया।

– केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार विश्वासमत में गिर जाने के बाद 1999 में फिर हुए चुनाव में भी मायावती ने इसी सीट को चुना। इस बार उन्होंने पिछले चुनाव से शानदार प्रदर्शन किया। 2,59,762 वोट हासिल कर उन्होंने सपा प्रत्याशी राम पियारे सुमन को  53,386 मत के बड़े अंतर से हराया।

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– बसपा प्रमुख ने वर्ष 2004 के चुनाव में भी अंबेडकरनगर का रुख किया। इस बार न सिर्फ उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाई वरन जीत का अंतर भी बढ़ाने में सफलता हासिल की। उन्हें 3,25,019 वोट मिले। उन्होंने  सपा के शंखलाल मांझी को 58,269 वोट से पीछे छोड़ दिया। हैट्रिक की सफलता के साथ मायावती ने अपने वोटों की संख्या तीन लाख के पार पहुंचा दी। हालांकि वोट में ज्यादा बढ़ोत्तरी सपा प्रत्याशी की भी हुई।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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