news
मुख्य खबर (Lead)
चारधाम यात्रा 2026 के तहत बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले धार्मिक परंपराएं तेज हो गई हैं। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, गाडू घड़ा (तेल कलश) और भगवान गरुड़ की पालकी बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हो गई है, जिससे पूरे उत्तराखंड में भक्ति और उत्साह का माहौल बन गया है।
गाडू घड़ा यात्रा का विशेष महत्व
- गाडू घड़ा यात्रा बदरीनाथ धाम की परंपरागत धार्मिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है
- इस यात्रा में पवित्र तेल (अभिषेक के लिए) धाम तक पहुंचाया जाता है
- यात्रा विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए बदरीनाथ पहुंचेगी
यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है और कपाट खुलने से पहले इसे बेहद शुभ माना जाता है
गरुड़ पालकी और शंकराचार्य गद्दी भी रवाना
- भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की डोली (पालकी) भी धाम के लिए निकाली गई
- आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी (आसन) को भी पारंपरिक विधि से ले जाया जा रहा है
- पूरे रास्ते श्रद्धालु फूल वर्षा और जयकारों के साथ स्वागत कर रहे हैं
इस दौरान जगह-जगह धार्मिक कार्यक्रम और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जा रहा है।
चारधाम यात्रा में बढ़ा उत्साह
- 2026 की चारधाम यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू हो चुकी है
- गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट पहले ही खुल चुके हैं
- केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट खुलने का श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं
बदरीनाथ धाम कब खुलेंगे कपाट
- बदरीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे
- उससे पहले सभी धार्मिक रस्में पूरी की जा रही हैं
- गाडू घड़ा यात्रा इस प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा है
श्रद्धालुओं में भक्ति का माहौल
यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।
- जगह-जगह स्वागत, भजन और पूजा
- स्थानीय लोग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं
- पूरा क्षेत्र “जय बदरी विशाल” के जयकारों से गूंज रहा है
निष्कर्ष
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले शुरू हुई ये धार्मिक यात्राएं सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक हैं। जैसे-जैसे कपाट खुलने की तारीख नजदीक आ रही है, उत्तराखंड में भक्ति का माहौल और गहराता जा रहा है।







