नैनीताल: नगर पालिका की लेकब्रिज चुंगी का 21 माह का ठेका बिना बोर्ड बैठक के आवंटित किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। आठ सभासदों, स्थानीय लोगों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे एकतरफा निर्णय बताया है।
सभासदों का आरोप है कि ठेका आवंटित करने से पहले बोर्ड बैठक नहीं बुलाई गई, जबकि दोपहिया वाहनों से प्रवेश शुल्क सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और संशोधन आवश्यक थे। उनका कहना है कि 1 जून को निविदा जारी होने के बाद लगातार बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की गई, लेकिन बैठक समय पर नहीं हुई और 14 जुलाई को ठेका आवंटित कर दिया गया।
सभासदों ने कहा कि इस मामले की शिकायत आयुक्त और जिलाधिकारी से भी की गई है। उनका आरोप है कि पालिका नियमों की अनदेखी कर लिया गया यह फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पूर्व पालिकाध्यक्ष एवं सभासद मुकेश जोशी ने भी कहा कि निविदा की शर्तों में बदलाव या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले बोर्ड की बैठक होना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो सक्षम अधिकारी इसकी जांच कर उचित कार्रवाई कर सकते हैं।
विवाद का एक प्रमुख कारण बाहरी दोपहिया वाहनों से ₹100 प्रवेश शुल्क भी है, जिसका कई सभासदों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि इस विषय पर विशेष बोर्ड बैठक में संशोधन का सुझाव दिया गया था।
वहीं, पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लेकब्रिज चुंगी का ठेका पूरी तरह पालिका और नगरहित में दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवेश शुल्क शासन की अधिसूचना और बोर्ड के पूर्व प्रस्ताव के अनुरूप है तथा स्थानीय दोपहिया वाहन मालिकों को निशुल्क पास जारी किए जाएंगे।
डॉ. खेतवाल ने कहा कि पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक निगरानी में संपन्न हुई है और यदि आवश्यक हो तो वे किसी भी स्तर की जांच, यहां तक कि सीबीआई जांच के लिए भी तैयार हैं।







