ऊधम सिंह नगर/लालकुआं (उत्तराखंड)। मोटाहल्दू स्थित मदरसन कंपनी में चल रहा कर्मचारियों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। प्रशासन की मध्यस्थता में कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच हुई वार्ता के बाद सहमति बन गई, जिसके बाद अधिकांश कर्मचारी काम पर लौट आए।
100 से ज्यादा कर्मचारियों ने किया था कार्य बहिष्कार
जानकारी के अनुसार, 100 से अधिक कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी समेत 14 सूत्रीय मांगों को लेकर लगातार दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार किया। कर्मचारियों ने कंपनी के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया और करीब पांच घंटे तक काम बंद रखा।
इससे पहले भी कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने, कार्य समय 8 घंटे करने और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर हड़ताल की थी, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था।
प्रशासन की मध्यस्थता से बनी सहमति
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और श्रम विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उपश्रमायुक्त और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच विस्तृत वार्ता हुई।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वेतन बढ़ोतरी समेत प्रमुख मांगों को जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य सरकार तक भेजा जाएगा और इस पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। इस भरोसे के बाद कर्मचारी आंदोलन खत्म करने को तैयार हो गए।
अधिकांश कर्मचारी लौटे काम पर
समझौते के बाद आधे से ज्यादा कर्मचारी तुरंत काम पर लौट गए, जबकि बाकी कर्मचारी अगले दिन से ड्यूटी जॉइन करने की बात कहकर घर चले गए। इससे कंपनी का कामकाज फिर से सामान्य होने लगा है।
हालांकि कुछ कर्मचारी अभी भी अपनी मुख्य मांगों—जैसे न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये और तय कार्य समय—पर अड़े हुए हैं और भविष्य में फिर आंदोलन की चेतावनी दी है।
हंगामे के बीच पुलिस कार्रवाई
प्रदर्शन के दौरान माहौल थोड़ा तनावपूर्ण भी हो गया था। पुलिस ने एहतियातन कांग्रेस नेता हरीश पनेरू और समाजसेवी पीयूष जोशी को हिरासत में लिया।
इसके अलावा, प्रशासन ने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले में 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई है।
भारी पुलिस बल रहा तैनात
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
मोटाहल्दू की मदरसन कंपनी में कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद फिलहाल शांत हो गया है। हालांकि कई मांगें अभी लंबित हैं, लेकिन वार्ता के जरिए समाधान निकलना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और कंपनी आगे क्या निर्णय लेते हैं।







