देहरादून/उत्तराखंड। हिमालय की गोद में बसे पवित्र केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026, बुधवार सुबह 8 बजे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसी के साथ विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 का औपचारिक शुभारंभ हो गया है।
कपाट खुलने के इस शुभ अवसर पर देशभर से हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच दर्शन प्रक्रिया शुरू हुई।
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि केदारनाथ सहित चारधाम यात्रा भारत की आस्था, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का “दिव्य उत्सव” है।
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Toggleपीएम मोदी की श्रद्धालुओं से खास अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने भक्तों से यात्रा के दौरान पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने की अपील की। इनमें शामिल हैं:
- स्वच्छता बनाए रखना
- पर्यावरण संरक्षण
- सेवा और सहयोग की भावना
- स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना
- यात्रा के नियमों का पालन करना
इसके साथ ही उन्होंने यात्रियों से “डिजिटल उपवास” रखने और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को नजदीक से अनुभव करने का भी आग्रह किया।
चारधाम यात्रा का पूरा शेड्यूल
चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत पहले ही हो चुकी है।
- गंगोत्री और यमुनोत्री धाम: 19 अप्रैल को खुले
- केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल को खुले
- बद्रीनाथ धाम: 23 अप्रैल को खुलेंगे
हर साल लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं और इसे हिंदू धर्म की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक माना जाता है।
भक्ति और आस्था का अनोखा संगम
करीब छह महीने के शीतकालीन विराम के बाद केदारनाथ धाम के कपाट खुलते ही एक बार फिर धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।
सरकार और प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। साथ ही श्रद्धालुओं को नियमों का पालन करने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष:
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा 2026 ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रधानमंत्री मोदी का संदेश इस यात्रा को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ता है। अब देखना होगा कि श्रद्धालु इन पांच संकल्पों को कितना अपनाते हैं और इस पावन यात्रा को और अधिक सफल बनाते हैं।







