ऊधम सिंह नगर (काशीपुर)। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला मां बाल सुंदरी देवी का ऐतिहासिक चैती मेला एक बार फिर श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत संगम लेकर आ रहा है। इस मेले की सबसे खास बात है मां भगवती का डोला, जिसे इस बार भी परिवार की चौथी पीढ़ी अपने कंधों पर उठाएगी।
25 मार्च की रात निकलेगा डोला
चैत्र नवरात्र की सप्तमी यानी 25 मार्च की अर्धरात्रि को पंडा आवास से मां बाल सुंदरी का डोला निकाला जाएगा। यह डोला मंदिर तक ले जाया जाता है, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु जुटते हैं।
चार पीढ़ियों से चल रही परंपरा
डोला उठाने की जिम्मेदारी खड़कपुर देवीपुरा के 12 सदस्यों की टीम निभा रही है।
इस परंपरा को उनके दादा-परदादा से शुरू होकर अब चौथी पीढ़ी तक आगे बढ़ाया जा रहा है।
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एक समय में 6 लोग कंधे पर डोला उठाते हैं
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हर 200–300 मीटर पर “बदलो” की आवाज के साथ कंधे बदलते हैं
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डोला बिना रुके लगातार आगे बढ़ता है
यह सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है।
मेले में पहली बार जीएसटी की सख्ती
इस बार चैती मेले में एक नया बदलाव देखने को मिलेगा:
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सभी व्यापारियों को अस्थायी जीएसटी पंजीकरण कराना होगा
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उन्हें अपनी आय के अनुसार 18% जीएसटी देना होगा
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विभाग मेले में विशेष निगरानी रखेगा
यह कदम मेले के व्यापार को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।
श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधा
मेले में आने वाले भक्तों के लिए भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा 15 दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा शिविर भी शुरू किया गया है, जिससे लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से मिल सकें।
आस्था और परंपरा का संगम
मां बाल सुंदरी का चैती मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही संस्कृति और विश्वास का जीवंत उदाहरण है। चौथी पीढ़ी द्वारा डोला उठाना इस परंपरा की निरंतरता और गहरी आस्था को दर्शाता है।
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