‘हेलो, मैंने मम्मी-पापा को मार दिया, जल्दी आ जाइए’… फोन सुनते ही पुलिस के उड़े होश, मौके पर पहुंची टीम तो खुला चौंकाने वाला राज
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta
खटीमा। उत्तराखंड के खटीमा में मंगलवार देर शाम उस समय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, जब डायल 112 पर एक युवक ने फोन कर कहा, ‘हेलो, मैंने मम्मी-पापा को मार दिया है, जल्दी आ जाइए।’ माता-पिता की हत्या किए जाने की सूचना मिलते ही पुलिस कर्मी तुरंत हरकत में आ गए और बिना देर किए मौके की ओर रवाना हो गए। हालांकि, घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पुलिस को जो सच्चाई पता चली, वह चौंकाने वाली थी। युवक ने माता-पिता द्वारा खर्च के लिए पैसे नहीं देने पर नाराज होकर पुलिस को झूठी सूचना दी थी।
पैसे नहीं मिलने पर युवक ने डायल 112 पर दी हत्या की सूचना
जानकारी के अनुसार, खटीमा के खेतलसंडा खाम निवासी अभिषेक राठौर ने मंगलवार देर शाम पुलिस के आपातकालीन नंबर 112 पर फोन किया। उसने पुलिस को बताया कि उसने अपने माता-पिता की हत्या कर दी है और पुलिस जल्द से जल्द मौके पर पहुंचे।
हत्या जैसी गंभीर घटना की सूचना मिलते ही पुलिस में अफरा-तफरी मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ उपनिरीक्षक केसी आर्य उपनिरीक्षक राकेश राय और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ तत्काल बताए गए स्थान पर पहुंचे।
मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को सुरक्षित मिले माता-पिता
पुलिस टीम जब युवक के घर पहुंची और मामले की जांच शुरू की, तो पता चला कि उसके माता-पिता सुरक्षित हैं और उनके साथ कोई अनहोनी नहीं हुई है। इसके बाद पुलिस ने युवक से पूछताछ की, जिसमें झूठी सूचना देने की वजह सामने आई।
पूछताछ में अभिषेक ने बताया कि वह अपने माता-पिता से खर्च के लिए पैसे मांग रहा था। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो इस बात को लेकर उसका विवाद हो गया। नाराज होकर उसने पुलिस को परेशान करने के इरादे से डायल 112 पर फोन किया और माता-पिता की हत्या करने की झूठी सूचना दे दी।
पुलिस ने युवक के खिलाफ की कार्रवाई
मामले की सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। हालांकि, आपातकालीन सेवा पर हत्या जैसी गंभीर घटना की झूठी सूचना देने के मामले को पुलिस ने गंभीरता से लिया।
पुलिस ने आरोपित युवक अभिषेक राठौर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 170 के तहत निरुद्ध कर दिया।
यह घटना बताती है कि आपातकालीन पुलिस सेवा पर झूठी सूचना देना न केवल पुलिस का समय और संसाधन बर्बाद करता है, बल्कि वास्तविक संकट में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचने में भी बाधा बन सकता है। इसलिए डायल 112 का इस्तेमाल केवल वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।