उत्तराखंड

नवरात्र के बीच बागेश्वर के मां भगवती मंदिर में भीषण आग, लकड़ी से बने मुख्य मंदिर को भारी नुकसान

नवरात्र के पावन अवसर पर बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील स्थित दूरस्थ बदियाकोट गांव में मां भगवती मंदिर में आग लगने से हड़कंप मच गया। आग की चपेट...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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16 अक्टूबर 2026, 05:04 पूर्वाह्न 1 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
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रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 1 day पहले

नवरात्र के पावन अवसर पर बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील स्थित दूरस्थ बदियाकोट गांव में मां भगवती मंदिर में आग लगने से हड़कंप मच गया। आग की चपेट में आने से मंदिर के मुख्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। लकड़ी से निर्मित मंदिर में आग तेजी से फैल गई, जिससे मंदिर का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ। घटना के बाद क्षेत्र के श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चिंता और दुख का माहौल है।

बागेश्वर। बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। लकड़ी पर की गई आकर्षक नक्काशी और पारंपरिक निर्माण शैली के लिए पहचाने जाने वाला यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में मंदिर में आग लगने की घटना से स्थानीय लोगों को गहरा आघात पहुंचा है।

लकड़ी का ढांचा होने से तेजी से फैली आग

स्थानीय निवासी आन सिंह के अनुसार, मंदिर का मुख्य ढांचा लकड़ी से बना हुआ था। मंदिर में बिजली की व्यवस्था के साथ पूजा-अर्चना के दौरान दीपक भी जलाए जाते थे। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या दीपक से निकली चिंगारी के कारण आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की अभी पुष्टि नहीं हुई है।

दुर्गम क्षेत्र में स्थित है मंदिर

बदियाकोट गांव कपकोट से लगभग 50 किलोमीटर दूर दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित अग्निशमन सुविधाओं के कारण ऐसे क्षेत्रों में आग की घटनाओं पर तत्काल काबू पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मंदिर को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन और आग लगने के कारणों की जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नवरात्र के बीच आस्था के इस प्रमुख केंद्र को पहुंचे नुकसान से क्षेत्र के श्रद्धालु व्यथित हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है।

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