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Uttarakhand: ऑपरेशन सिंदूर के बाद मसूरी के पर्यटन पर भी पड़ा असर, बुकिंग में भी 50 फीसदी तक की आई कमी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद मसूरी के पर्यटन पर भी असर पड़ा है। देश के विभिन्न राज्यों के पर्यटकों ने अपनी एडवांस बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है।...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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10 मई 2025, 06:22 अपराह्न 0 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 3 मिनट
रिपोर्टर Uttarakhand Ekta
अपडेट किया गया 1 year पहले

ऑपरेशन सिंदूर के बाद मसूरी के पर्यटन पर भी असर पड़ा है। देश के विभिन्न राज्यों के पर्यटकों ने अपनी एडवांस बुकिंग रद्द करनी शुरू कर दी है। वीकेंड की बुकिंग पर भी करीब 50 फीसदी तक का असर पड़ा है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान में तनाव है। शहर के होटलों की करीब 30 फीसदी एडवांस बुकिंग रद्द हो चुकी है। वीकेंड के लिए एडवांस बुकिंग में भी 50 फीसदी तक की कमी आई है। शहर के होटलों में मई-जून के लिए कोई नई बुकिंग नहीं आ रही है। पंजाब, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, यूपी सहित कई राज्यों के पर्यटकों ने अपनी मसूरी यात्रा रद्द कर दी है। इससे पर्यटन व्यवसाय को आर्थिक नुकसान की आशंका है।

कैंपटी रोड स्थित होटल के स्वामी आशीष गोयल ने बताया कि उनके होटल बृहस्पतिवार को आए लोगों को वीकेंड तक रुकना था, लेकिन शुक्रवार को ही पर्यटक मसूरी छोड़कर चले गए। कुछ कपल्स ने भी चार दिनों की बुकिंग रद्द की है।

मुबंई के पर्यटकों ने भी एडवांस बुकिंग कैंसिल की है। करीब 15 फीसदी एडवांस बुकिंग रद्द हुई है। वहीं, मसूरी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि करीब 30 फीसदी एडवांस बुकिंग कैंसिल हो गई है।साथ ही नई बुकिंग नहीं हो रही है। इससे नुकसान की आशंका है।नामी स्कूलों ने बच्चों को घर ले जाने का दिया विकल्प

सूत्रों के अनुसार शहर के कई नामी स्कूलों ने अभिभावकों को अपने बच्चों को घर ले जाने का विकल्प दिया है। एक प्रतिष्ठित स्कूल ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। फिलहाल किसी भी प्रकार की चिंता की कोई स्थिति नहीं है, लेकिन अभिभावकों को बढ़ती चिंता के चलने यह विकल्प दिया है कि जो भी अभिभावक बच्चे को घर ले जाना चाहें, वे उन्हें ले जा सकते हैं। वहीं, एक अन्य स्कूल ने बताया कि कोई अभिभावक बच्चों को लेकर ज्यादा परेशान है तो उन्हें बच्चों को घर ले जाने की अनुमति दी जाएगी।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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