27 अक्टूबर से गैरसैंण में गूंजेगी विधानसभा की कार्यवाही, उत्तराखंड के तीसरे सत्र की अधिसूचना जारी
Sanskriti
विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta
ग्रीष्मकालीन राजधानी में दो दिवसीय सत्र के लिए तैयारियां तेज, अनुपूरक बजट और महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश कर सकती है धामी सरकार
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का इस वर्ष का तीसरा सत्र 27 अक्टूबर से ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित किया जाएगा। सत्र के आयोजन को लेकर मंगलवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई। लोकभवन से स्वीकृति मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय ने सत्र की तिथियों की घोषणा की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विधानसभा का यह सत्र दो दिवसीय होगा।
लोकभवन की स्वीकृति के बाद जारी हुई अधिसूचना
उत्तराखंड विधानसभा के आगामी सत्र को गैरसैंण में आयोजित करने की प्रक्रिया लोकभवन से स्वीकृति मिलने के बाद आगे बढ़ी। इसके बाद मंगलवार को सत्र की अधिसूचना जारी की गई। 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय की ओर से आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
गैरसैंण राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी है और यहां विधानसभा सत्र आयोजित किए जाने का विशेष महत्व है। ऐसे में आगामी सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही के साथ-साथ राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
अनुपूरक बजट पेश कर सकती है सरकार
दो दिवसीय सत्र के दौरान पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अनुपूरक बजट पेश कर सकती है। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन में लाए जाने की संभावना जताई गई है। हालांकि, अनुपूरक बजट और विधेयकों को लेकर विस्तृत कार्यसूची की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अनुपूरक बजट के माध्यम से सरकार चालू वित्तीय वर्ष में ऐसी अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताओं के लिए प्रावधान कर सकती है, जिनके लिए मूल बजट में पर्याप्त राशि निर्धारित नहीं की गई हो। यदि इसे सदन में प्रस्तुत किया जाता है, तो इस पर चर्चा और विधायी प्रक्रिया सत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।
विधानसभा सचिवालय ने तैयारियों की पुष्टि की
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा है कि गैरसैंण में सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा सचिवालय पूरी तरह तैयार है। उनके अनुसार, सत्र के संचालन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
अब 27 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस सत्र में सदन की कार्यवाही, संभावित वित्तीय प्रस्तावों और विधायी विषयों पर नजर रहेगी। दो दिन के निर्धारित कार्यक्रम में सरकार और विधानसभा के सामने महत्वपूर्ण विषयों को सदन में रखने का अवसर होगा। सत्र की विस्तृत कार्यसूची सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को औपचारिक रूप से कार्यवाही में शामिल किया जाता है।