उत्तराखंड की जमीन, प्राकृतिक संसाधनों, कृषि भूमि और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से राज्य में 2025 का संशोधित भू-कानून लागू किया गया है। इस कानून के तहत राज्य के बाहर के लोगों के लिए कृषि और बागवानी भूमि खरीदने के नियमों को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है।
11 जिलों में कृषि और बागवानी भूमि खरीद पर रोक
नए कानून के तहत हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर उत्तराखंड के 11 जिलों में बाहरी राज्य के लोग कृषि और बागवानी भूमि नहीं खरीद सकते। यह प्रावधान नगर निकायों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों से अलग भूमि पर लागू होता है।
आवासीय जमीन के लिए 250 वर्गमीटर का प्रावधान
आवासीय उपयोग के लिए 250 वर्गमीटर तक भूमि खरीदने का प्रावधान बरकरार है। खरीद से पहले खरीदार को सब-रजिस्ट्रार के समक्ष शपथपत्र देना होगा कि उसने या उसके परिवार ने राज्य में आवासीय उद्देश्य से पहले 250 वर्गमीटर से अधिक भूमि नहीं खरीदी है। गलत जानकारी पाए जाने पर भूमि हस्तांतरण पर कार्रवाई का प्रावधान है।
उद्योग और पर्यटन के लिए भी नियम सख्त
नए कानून में उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य निर्धारित उपयोगों के लिए भूमि खरीद पर भी नियम और शर्तें लागू की गई हैं। कुछ मामलों में संबंधित नीति के अनुरूप राज्य सरकार की पूर्व अनुमति और आवश्यक प्रमाण-पत्र की जरूरत हो सकती है।
क्यों जरूरी माना जा रहा है नया भू-कानून?
राज्य सरकार के अनुसार, कानून का उद्देश्य कृषि एवं बागवानी भूमि के दुरुपयोग को रोकना, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना और उत्तराखंड की सांस्कृतिक एवं सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखना है। सरकार ने इसे भूमि के अनियंत्रित हस्तांतरण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
हालांकि, जमीन खरीदने या बेचने से जुड़े नियम भूमि के प्रकार, स्थान, उपयोग और संबंधित क्षेत्र की स्थिति के आधार पर अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी भूमि सौदे से पहले लागू कानून और संबंधित सरकारी प्राधिकरण के नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।







