उत्तराखंड

पिथौरागढ़ बाइक हादसे में घायल गोविंद सिंह ने तोड़ा दम, तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई की मांग

पिथौरागढ़। बजेटी के पास 23 सितंबर को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 28 वर्षीय गोविंद सिंह की बुधवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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1 अक्टूबर 2026, 08:49 पूर्वाह्न 4 व्यूज 2 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 2 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 6 days पहले

पिथौरागढ़। बजेटी के पास 23 सितंबर को हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 28 वर्षीय गोविंद सिंह की बुधवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। तेज रफ्तार बाइक की टक्कर में गंभीर रूप से घायल गोविंद सिंह ने कई दिनों तक जिंदगी के लिए संघर्ष किया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया।

गोविंद सिंह बोक्टा मुवानी निवासी दीवान सिंह के पुत्र थे। हादसे के बाद उन्हें गंभीर हालत में पिथौरागढ़ जिला अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें एसटीएच हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया था।

सिर और शरीर के कई हिस्सों में आई थीं गंभीर चोटें

बताया गया कि हादसे में गोविंद सिंह के सिर, पैर समेत शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। परिजनों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर पहुंचाया, जहां उनका उपचार चल रहा था।

बुधवार को उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र में भी शोक की लहर है।

तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई की मांग

हादसे के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में तेज रफ्तार वाहनों के कारण सड़क हादसों का खतरा लगातार बना रहता है।

गोविंद सिंह की मौत के बाद अब पुलिस द्वारा हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच और आगे की कार्रवाई की जा रही है। स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और तेज रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण की मांग की है।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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