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उत्तराखंड में हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा से कांग्रेस में बढ़ी हलचल, चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर उठे सवाल

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत की जनसंवाद...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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7 अक्टूबर 2026, 05:07 पूर्वाह्न 2 व्यूज 4 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 4 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 16 hours पहले

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से यात्रा को लेकर आपत्ति जताए जाने के बावजूद रावत के कार्यक्रम आगे बढ़ने से प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ABP News

दरअसल, कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है और प्रदेश में चुनावी अभियान को सामूहिक नेतृत्व तथा संगठनात्मक समन्वय के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच हरीश रावत की अलग से निकाली जा रही जनसंवाद यात्रा ने पार्टी की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी यात्रा को लेकर आपत्ति जताई है। Jagran

हाईकमान की आपत्ति के बावजूद आगे बढ़ी यात्रा

रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस नेतृत्व ने हरीश रावत से प्रदेश कांग्रेस के समानांतर किसी यात्रा को आगे नहीं बढ़ाने को कहा था। नेतृत्व का तर्क था कि चुनावी तैयारियों के महत्वपूर्ण दौर में अलग-अलग स्तर पर चलने वाली राजनीतिक गतिविधियों से संगठनात्मक समन्वय प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद रावत ने अपनी जनसंवाद यात्रा जारी रखी। ABP News

इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को फिर चर्चा में ला दिया है। पार्टी में पहले भी नेतृत्व, संगठन में जिम्मेदारियों और चुनावी तैयारियों को लेकर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। अप्रैल 2026 में भी पार्टी के भीतर गुटीय खींचतान को लेकर खबरें सामने आई थीं। Jagran

टिकट और संगठन में भूमिका को लेकर भी चर्चा

हरीश रावत की सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है जब कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने और संभावित उम्मीदवारों की तैयारियों में जुटी है। टिकट वितरण, संगठन में नेताओं की भूमिका और चुनावी अभियान की कमान जैसे मुद्दे आने वाले समय में पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

हालांकि, हरीश रावत पहले भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि कांग्रेस में नए लोगों को मौका मिलना चाहिए और उन्होंने अप्रैल 2026 में कहा था कि उन्हें अब न पद चाहिए और न टिकट। Navbharat Times

वहीं सितंबर में रावत ने कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। यह घटनाक्रम उनके पूर्व सहयोगी से जुड़े ईडी प्रकरण के बीच सामने आया था और इसके बाद भी पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक भविष्य तथा संगठन से संबंधों को लेकर चर्चा तेज हुई। NDTV India

कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के लिए बनाई समितियां

कांग्रेस हाईकमान ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत अगस्त 2026 में पांच समितियों का गठन भी किया था। इन समितियों को चुनाव से जुड़े अलग-अलग दायित्व सौंपे गए हैं। ऐसे में पार्टी का प्रयास संगठनात्मक स्तर पर चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का है। Jagran

इसी पृष्ठभूमि में हरीश रावत की यात्रा को लेकर विवाद सामने आना कांग्रेस के लिए संगठनात्मक समन्वय का मुद्दा बन गया है। एक तरफ पार्टी को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखना भी जरूरी होगा।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

15 hours पहले • 3 व्यूज व्यूज