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अल्मोड़ा के रानीखेत में भारत-यूएई का ‘माउंटेन गार्डियन-2026’ सैन्य अभ्यास शुरू, महिला सैनिक भी लेंगी हिस्सा

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘माउंटेन गार्डियन-2026’ शुरू हो गया है। पर्वतीय क्षेत्र में...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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7 अक्टूबर 2026, 05:12 पूर्वाह्न 2 व्यूज 4 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
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रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 1 hour पहले

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘माउंटेन गार्डियन-2026’ शुरू हो गया है। पर्वतीय क्षेत्र में सैन्य अभियानों की क्षमता और दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित यह अभ्यास विशेष रूप से माउंटेन वारफेयर यानी पर्वतीय युद्ध पर केंद्रित है।

अभ्यास में भारत और यूएई की सैन्य टुकड़ियां संयुक्त रूप से विभिन्न सैन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। इस दौरान कठिन पर्वतीय इलाकों में अभियान चलाने, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सामरिक संचालन और एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।

पर्वतीय युद्ध कौशल पर रहेगा विशेष फोकस

रानीखेत का पहाड़ी और चुनौतीपूर्ण भूभाग इस सैन्य अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक पर्वतीय परिस्थितियों में अभियान संचालन से जुड़ी तकनीकों और प्रक्रियाओं का संयुक्त रूप से अभ्यास करेंगे।

इसमें कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों की आवाजाही, सामरिक योजना, निगरानी, टीमवर्क और आपसी संचार जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और सैन्य प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा।

महिला अधिकारी और सैनिक भी होंगी शामिल

‘माउंटेन गार्डियन-2026’ की एक खास बात यह है कि भारत और यूएई की महिला अधिकारी एवं महिला सैनिक भी अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। इससे दोनों देशों की सेनाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका भी सामने आती है।

महिला सैन्यकर्मियों की भागीदारी के साथ यह अभ्यास सैन्य सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के बीच पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान का भी माध्यम बनेगा।

भारत-यूएई रक्षा सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

भारत और यूएई के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लगातार बढ़ाया गया है। संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के साथ काम करने और संयुक्त अभियानों के लिए आवश्यक समन्वय विकसित करने का अवसर देते हैं।

‘माउंटेन गार्डियन-2026’ भी इसी सहयोग की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। पर्वतीय युद्ध पर विशेष ध्यान दिए जाने के कारण यह अभ्यास दोनों सेनाओं के लिए अलग तरह का प्रशिक्षण अनुभव प्रदान करेगा।

रानीखेत में सैन्य गतिविधियों से बढ़ी हलचल

अल्मोड़ा का रानीखेत लंबे समय से सैन्य गतिविधियों और प्रशिक्षण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां भारतीय सेना की मौजूदगी और पहाड़ी भूभाग के कारण पर्वतीय प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त परिस्थितियां उपलब्ध हैं।

भारत और यूएई के सैनिकों के संयुक्त अभ्यास से क्षेत्र में सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। अभ्यास के दौरान सैनिक निर्धारित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अलग-अलग सैन्य गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।

आपसी अनुभव साझा करेंगे दोनों देशों के सैनिक

संयुक्त अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों के सैन्यकर्मियों के बीच अनुभव और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान भी है। अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने वाले सैनिक जब संयुक्त प्रशिक्षण में हिस्सा लेते हैं तो उन्हें एक-दूसरे की रणनीति, उपकरणों के उपयोग और संचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलता है।

‘माउंटेन गार्डियन-2026’ के जरिए भारत और यूएई की सेनाएं पर्वतीय क्षेत्र में संयुक्त रूप से काम करने की अपनी क्षमता को और मजबूत करने पर ध्यान देंगी। साथ ही यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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