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बाघ से ज्यादा ‘चटोरा’ है तेंदुआ, दोनों के आहार में बड़ा अंतर; WII की रिसर्च में हुआ खुलासा

देहरादून। महाराष्ट्र के सह्याद्रि टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुए के खानपान को लेकर किए गए एक अध्ययन में दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII)...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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5 अक्टूबर 2026, 05:02 पूर्वाह्न 2 व्यूज 2 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
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रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 3 hours पहले

देहरादून। महाराष्ट्र के सह्याद्रि टाइगर रिजर्व में बाघ और तेंदुए के खानपान को लेकर किए गए एक अध्ययन में दिलचस्प तथ्य सामने आए हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के अध्ययन के मुताबिक, बाघ की तुलना में तेंदुए का आहार कहीं अधिक विविध पाया गया है। यानी तेंदुआ शिकार के मामले में ज्यादा विकल्प अपनाता है, जबकि बाघ का आहार अपेक्षाकृत सीमित प्रजातियों पर केंद्रित रहता है।

अध्ययन के दौरान बाघ, तेंदुए और ढोल (जंगली शिकारी कुत्ते) के कुल 107 मल नमूनों का विश्लेषण किया गया। जांच में इनके आहार में शामिल कुल 14 शिकार प्रजातियों की पहचान की गई। इनमें बाघ के आहार की विविधता सबसे कम पाई गई, जबकि तेंदुए और ढोल के भोजन में अपेक्षाकृत अधिक विविधता दर्ज की गई।

शोध में यह भी सामने आया कि बाघ और तेंदुए के आहार में कुछ शिकार प्रजातियां समान हैं, लेकिन तेंदुए की आहार श्रृंखला का दायरा काफी व्यापक है। तेंदुआ उपलब्धता और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग प्रजातियों को अपना शिकार बनाने में सक्षम है।

यह अध्ययन जंगल में एक ही क्षेत्र में रहने वाले बड़े मांसाहारी वन्यजीवों के बीच भोजन और संसाधनों के बंटवारे को समझने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह जानने में भी मदद मिलती है कि बाघ, तेंदुआ और ढोल जैसे शिकारी एक ही प्राकृतिक क्षेत्र में रहते हुए किस तरह अलग-अलग शिकार संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं।

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