उत्तराखंड

पश्चिमी हिमालय में किंग कोबरा का सुरक्षित ठिकाना बना नैनीताल, 2300 मीटर की ऊंचाई पर मिला घोंसला

हल्द्वानी। उत्तराखंड का नैनीताल जिला पश्चिमी हिमालय में किंग कोबरा के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षित आवास के रूप में उभरा है। समुद्र तल से 2300 मीटर की ऊंचाई...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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21 अक्टूबर 2026, 05:25 पूर्वाह्न 2 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
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रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 47 minutes पहले

हल्द्वानी। उत्तराखंड का नैनीताल जिला पश्चिमी हिमालय में किंग कोबरा के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षित आवास के रूप में उभरा है। समुद्र तल से 2300 मीटर की ऊंचाई पर किंग कोबरा का घोंसला मिलने से इस दुर्लभ सांप के प्राकृतिक आवास और ऊंचाई पर उसकी मौजूदगी को लेकर नई जानकारी सामने आई है।

भवाली में वर्ष 2006 में पहली बार मिला किंग कोबरा

परंपरागत रूप से किंग कोबरा की मौजूदगी पश्चिमी घाट के जंगलों में अधिक मानी जाती रही है। यह क्षेत्र ताप्ती नदी घाटी से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ है। हालांकि, पश्चिमी हिमालय में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भवाली क्षेत्र में वर्ष 2006 में किंग कोबरा मिलने की जानकारी सामने आई थी।

मुक्तेश्वर में 2300 मीटर की ऊंचाई पर मिला घोंसला

वर्ष 2012 में नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 2300 मीटर की ऊंचाई पर किंग कोबरा का घोंसला मिला था। इस खोज को दुनिया में किंग कोबरा के सबसे अधिक ऊंचाई पर दर्ज घोंसलों में एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड माना गया। यह खोज इस प्रजाति के आवास और उसके भौगोलिक विस्तार को समझने के लिहाज से अहम रही।

वन विभाग ने शुरू कराया किंग कोबरा पर शोध

उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान केंद्र ने वर्ष 2021 में किंग कोबरा को लेकर शोध कार्य शुरू कराया। इस अध्ययन में वर्ष 2015 से 2020 के बीच प्रदेश के उन जिलों से संबंधित आंकड़ों को आधार बनाया गया, जहां किंग कोबरा की मौजूदगी दर्ज की गई थी।

इस शोध का उद्देश्य राज्य में किंग कोबरा के वितरण और उसके प्राकृतिक आवास से जुड़ी जानकारी को बेहतर ढंग से समझना था। नैनीताल जिले में इसकी मौजूदगी और अधिक ऊंचाई पर घोंसला मिलने के तथ्य पश्चिमी हिमालय की जैव विविधता के महत्व को भी रेखांकित करते हैं।

किंग कोबरा जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

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