उत्तराखंड

सूरज से निकलेगी रोजगार की नई रोशनी, बागेश्वर के ओलखसों गांव में लगेगा 200 किलोवाट का सोलर प्लांट, 50% अनुदान से बढ़ेगा स्वरोजगार

बागेश्वर। पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों और पलायन की चुनौती के बीच अब सौर ऊर्जा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने लगी है। बागेश्वर जिले के ओलखसों...
Sanskriti

Sanskriti

विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

शेयर करें:
7 अक्टूबर 2026, 05:15 पूर्वाह्न 3 व्यूज 4 मिनट पढ़ें
त्वरित सारांश
स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 4 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 16 hours पहले

बागेश्वर। पहाड़ों में रोजगार के सीमित अवसरों और पलायन की चुनौती के बीच अब सौर ऊर्जा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने लगी है। बागेश्वर जिले के ओलखसों गांव में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 200 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ही गांव की आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उत्तराखंड में सौर ऊर्जा को स्वरोजगार के माध्यम के रूप में बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना लागू की गई है। योजना का उद्देश्य युवाओं, स्थानीय निवासियों और अन्य पात्र लाभार्थियों को सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर आय का साधन उपलब्ध कराना है। उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) की वेबसाइट पर मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना से संबंधित योजना दस्तावेज और स्थापित सोलर पावर प्लांट की जानकारी उपलब्ध है। Ureda

ओलखसों गांव में स्थापित होगा 200 किलोवाट का संयंत्र

ओलखसों गांव में प्रस्तावित 200 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ी क्षेत्रों में खेती और पारंपरिक रोजगार के सीमित विकल्पों के कारण ग्रामीण युवाओं को अक्सर रोजगार की तलाश में मैदानी शहरों या दूसरे राज्यों की ओर जाना पड़ता है। ऐसे में सौर ऊर्जा जैसी परियोजनाएं गांव में रहकर आय अर्जित करने का विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं।

50 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में अनुदान की व्यवस्था शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार परियोजना की लागत में 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलने का प्रावधान है। इससे पात्र लाभार्थियों के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने में शुरुआती वित्तीय बोझ कम हो सकता है।

योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए पात्रता, परियोजना क्षमता, वित्तीय सहायता और अन्य शर्तें निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू होती हैं। इसलिए इच्छुक लोगों को आवेदन से पहले UREDA के मौजूदा दिशा-निर्देशों और संबंधित विभाग से पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए। Ureda

गांव में रहकर कमाई का बन सकता है जरिया

सौर ऊर्जा संयंत्र को केवल बिजली उत्पादन की परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार और आय का स्थायी माध्यम भी बन सकता है। संयंत्र के संचालन, रखरखाव और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर काम के अवसर पैदा हो सकते हैं।

उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत स्थापित सोलर प्लांट लोगों के लिए आय का जरिया बन रहे हैं। चंपावत में योजना के लाभार्थियों द्वारा सोलर पावर प्लांट से बिजली उत्पादन कर आय अर्जित करने की रिपोर्ट सामने आई है। Amar Ujala

पहाड़ों में पलायन रोकने की दिशा में उम्मीद

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पलायन लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक चुनौती रहा है। रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों की ओर जाते हैं।

ऐसे में यदि गांवों में ही सौर ऊर्जा, पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण और अन्य स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है तो स्थानीय लोगों के लिए आय के नए विकल्प तैयार हो सकते हैं। ओलखसों में स्थापित किया जा रहा सोलर प्लांट इसी दिशा में एक उदाहरण बन सकता है।

और खबरें - उत्तराखंड

सभी देखें ›
उत्तराखंड

धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

15 hours पहले • 3 व्यूज व्यूज