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दयनीय:मंत्री उनियाल के क्षेत्र मे ये कैसा हाल,सिस्टम पर उठ रहे सवाल,इस विद्यालय मे छात्राएँ पानी से बेहाल

टिहरी। जनपद के नरेन्द्रनगर विधानसभा क्षेत्र आमपाटा में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्रावास में इन दिनों पानी का घोर संकट बना हुआ है। जिसके चलते विद्यालय के...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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29 अप्रैल 2024, 06:17 पूर्वाह्न 2 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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रिपोर्टर Uttarakhand Ekta
अपडेट किया गया 2 years पहले

टिहरी। जनपद के नरेन्द्रनगर विधानसभा क्षेत्र आमपाटा में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्रावास में इन दिनों पानी का घोर संकट बना हुआ है। जिसके चलते विद्यालय के हास्टल में रह रही 150 छात्राओं को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि इन छात्राओं को दो बूंद पीने के पानी के लिए करीब दो किलोमीटर की दूरी नापनी पड़ रही है। हास्टल में पानी की समस्या के चलते छात्राएं दो हफ्ते से नहाने और कपड़े धोने जैसे कार्य भी नहीं कर पा रही है। जिससे कुछ बालिकाओं ने छात्रावास छोड़ दिया है।

बता दें कि आमपाटा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्रावास में लगभग 150 छात्राएं हैं।छात्रावास में दो-दो पेयजल लाइन होने के बावजूद भी यहां पानी की समस्या बनी हुई है अमूमन गर्मियों में तो ये समस्या और विकट हो जाती है। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्रावास के लिए आ रही पेयजल लाइन में जगह जगह गांव वालों को कनेक्शन देने से छात्रावास तक बहुत ही कम मात्रा में पानी पहुंच पाता है। वहीं गेंडीगांव से छात्रावास तक आने वाली दूसरी पेयजल लाइन में तो पानी ही नहीं आता है। छात्राएं पीने के पानी के साथ ही अपने रोजमर्रा के कामों के लिए डेढ़ से दो किमी दूर गदेरे से पानी ढोने को मजबूर है और उनका आधे से ज्यादा समय पानी ढोने में ही बर्बाद हो जाता  है।

वंही, बालिका विद्यालय छात्रावास में पानी की समस्या के कारण पिछले वर्ष करीब डेढ़ दर्जन छात्राएं अपने घर वापस लौट गई। छात्रावास में पानी की किल्लत से हो रही दिक्कतों के कारण अब अभिभावक भी अपने बच्चों को यहां भेजने में कतरा रहे हैं। जबकि विद्यालय शिक्षक और प्रबंधन का कहना है कि पानी की समस्या को लेकर जल संस्थान से लेकर जल निगम के अधिकारियों के साथ ही विभागीय अधिकारियों को भी शिकायत की गई लेकिन कोई भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों की अनदेखी और पानी की समस्या का समाधान नहीं होने के कारण कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छात्रावास की छात्राएं इसका खामियाजा भुगतने को मजबूर है और ऐसे में शासन प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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