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नई फिल्म नीति से बदली तस्वीर: मुंबई का सफर हुआ छोटा, अब उत्तराखंड में मिल रहा काम

देहरादून। कभी उत्तराखंड के युवाओं के लिए फिल्मों में पहचान बनाने का मतलब मुंबई की राह पकड़ना था। लेकिन अब राज्य में फिल्म निर्माण और क्षेत्रीय सिनेमा को...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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3 अक्टूबर 2026, 04:55 पूर्वाह्न 2 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 3 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 4 days पहले

देहरादून। कभी उत्तराखंड के युवाओं के लिए फिल्मों में पहचान बनाने का मतलब मुंबई की राह पकड़ना था। लेकिन अब राज्य में फिल्म निर्माण और क्षेत्रीय सिनेमा को मिल रहे प्रोत्साहन से तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 के तहत स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने के साथ राज्य को फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

नई फिल्म नीति का असर क्षेत्रीय सिनेमा पर भी दिखाई दे रहा है। सरकार के अनुसार, कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी भाषा में बनने वाली फिल्मों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। इसका उद्देश्य स्थानीय भाषा और संस्कृति पर आधारित फिल्मों के निर्माण को बढ़ावा देना भी है।

फिल्म निर्माण से जुड़े अवसर केवल अभिनय तक सीमित नहीं हैं। कैमरा, मेकअप, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग, एडिटिंग, प्रोडक्शन, लोकेशन मैनेजमेंट और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी स्थानीय युवाओं के लिए काम के अवसर बन रहे हैं।

नीति के तहत फिल्म क्षेत्र में प्रशिक्षण को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2026 में उत्तराखंड के तीन युवाओं को एफटीआईआई, पुणे से पढ़ाई पूरी करने के बाद फिल्म नीति के तहत छात्रवृत्ति दी गई। नीति में प्रतिष्ठित फिल्म संस्थानों में प्रवेश लेने वाले उत्तराखंड के स्थायी निवासी विद्यार्थियों के लिए मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति का प्रावधान है।

क्षेत्रीय फिल्मों को मिलने वाले सरकारी सहयोग में भी वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 फिल्मों को 8.28 करोड़ रुपये का अनुदान दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

ऐसे में उत्तराखंड के उन युवाओं के लिए फिल्म क्षेत्र में आगे बढ़ने के रास्ते खुल रहे हैं, जिन्हें पहले अवसरों की तलाश में मुंबई या दूसरे बड़े फिल्म केंद्रों का रुख करना पड़ता था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर रोजगार के वास्तविक विस्तार का आकलन करने के लिए आने वाले समय में फिल्मों की संख्या, स्थानीय कलाकारों-तकनीशियनों की भागीदारी और नियमित रोजगार के आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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