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अर्धकुंभ 2027 से पहले हरिद्वार की राह होगी आसान, दिसंबर से रिंग रोड पर दौड़ेंगे वाहन

हरिद्वार। अर्धकुंभ-2027 से पहले हरिद्वार की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शहर में लंबे समय से जाम की समस्या को कम करने के लिए...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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7 अक्टूबर 2026, 05:21 पूर्वाह्न 2 व्यूज 7 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 7 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 16 hours पहले

हरिद्वार। अर्धकुंभ-2027 से पहले हरिद्वार की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शहर में लंबे समय से जाम की समस्या को कम करने के लिए तैयार की जा रही स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर और हरिद्वार बाईपास (रिंग रोड) परियोजनाएं अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाईपास का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे दिसंबर 2026 तक यातायात के लिए खोलने की तैयारी है।

रिंग रोड के शुरू होने के बाद हरिद्वार शहर के मुख्य मार्गों पर बाहरी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से आने-जाने वाले ऐसे वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा, जिन्हें शहर के भीतर प्रवेश करने की जरूरत नहीं है। इससे अर्धकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

51 किलोमीटर लंबा होगा स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार 51 किलोमीटर लंबे छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर का करीब 92 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। लगभग 46 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा होने की जानकारी है।

यह कॉरिडोर दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ने का काम करेगा। परियोजना का एक सिरा हलगोया मुस्तकम के पास से शुरू होकर भड़ेड़ी राजपूताना के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-58 से जुड़ेगा।

कॉरिडोर के तैयार होने के बाद दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से हरिद्वार आने वाले वाहनों को अधिक व्यवस्थित और तेज वैकल्पिक संपर्क मार्ग मिल सकेगा।

दिसंबर में बाईपास खोलने की तैयारी

हरिद्वार बाईपास को दिसंबर में यातायात के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। निर्माण पूरा होने के बाद यह मार्ग शहर के मौजूदा यातायात नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।

फिलहाल हरिद्वार में पर्यटन सीजन, सप्ताहांत, कांवड़ यात्रा और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है।

रिंग रोड के संचालन में आने से शहर के भीतर जाने वाले और केवल हरिद्वार के आसपास से गुजरने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होंगे।

अर्धकुंभ के दौरान मिलेगी बड़ी मदद

हरिद्वार में वर्ष 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होना है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

रिंग रोड और स्पर-टू कॉरिडोर के तैयार होने से प्रशासन को वाहनों के रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्रबंधन में अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। बाहरी वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से दूर रखते हुए निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा सकेगा।

इससे हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों और बाजार क्षेत्रों में यातायात का दबाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार का संपर्क होगा बेहतर

स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ाव है। इससे दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

नया छह लेन कॉरिडोर एक्सेस कंट्रोल्ड होने के कारण लंबी दूरी के यातायात के लिए अधिक व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध कराएगा। इससे मौजूदा सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।

हरिद्वार केवल धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र ही नहीं, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण शहर है। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से स्थानीय आवागमन और माल परिवहन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

शहर के भीतर जाम से मिलेगी राहत

हरिद्वार में हर दिन बड़ी संख्या में स्थानीय वाहन, पर्यटक वाहन, बसें और व्यावसायिक वाहन चलते हैं। इसके अलावा धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात की गति प्रभावित होती है।

रिंग रोड का उद्देश्य ऐसे यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है, जिससे हर वाहन को शहर के घने हिस्सों से होकर गुजरने की आवश्यकता न पड़े।

विशेष रूप से अर्धकुंभ के दौरान यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, जब प्रशासन को स्थानीय यातायात और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को अलग-अलग मार्गों पर संचालित करना होगा।

कनेक्टिविटी के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा

नई सड़क परियोजनाओं का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से हरिद्वार के आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, देहरादून और हरिद्वार के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने से यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।

अर्धकुंभ से पहले तैयारियों को मिलेगी गति

अर्धकुंभ-2027 को देखते हुए हरिद्वार में सड़क, यातायात और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर और रिंग रोड का समय पर तैयार होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यदि दिसंबर में हरिद्वार बाईपास यातायात के लिए खोल दिया जाता है, तो अर्धकुंभ से पहले शहर को एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक यातायात मार्ग मिल जाएगा। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर के शेष कार्य पूरे होने से दिल्ली-एनसीआर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

15 hours पहले • 3 व्यूज व्यूज