अर्धकुंभ 2027 से पहले हरिद्वार की राह होगी आसान, दिसंबर से रिंग रोड पर दौड़ेंगे वाहन
Sanskriti
विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta
हरिद्वार। अर्धकुंभ-2027 से पहले हरिद्वार की यातायात व्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। शहर में लंबे समय से जाम की समस्या को कम करने के लिए तैयार की जा रही स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर और हरिद्वार बाईपास (रिंग रोड) परियोजनाएं अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक बाईपास का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और इसे दिसंबर 2026 तक यातायात के लिए खोलने की तैयारी है।
रिंग रोड के शुरू होने के बाद हरिद्वार शहर के मुख्य मार्गों पर बाहरी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से आने-जाने वाले ऐसे वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकेगा, जिन्हें शहर के भीतर प्रवेश करने की जरूरत नहीं है। इससे अर्धकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
51 किलोमीटर लंबा होगा स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार 51 किलोमीटर लंबे छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर का करीब 92 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। लगभग 46 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा होने की जानकारी है।
यह कॉरिडोर दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे को हरिद्वार से जोड़ने का काम करेगा। परियोजना का एक सिरा हलगोया मुस्तकम के पास से शुरू होकर भड़ेड़ी राजपूताना के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-58 से जुड़ेगा।
कॉरिडोर के तैयार होने के बाद दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से हरिद्वार आने वाले वाहनों को अधिक व्यवस्थित और तेज वैकल्पिक संपर्क मार्ग मिल सकेगा।
दिसंबर में बाईपास खोलने की तैयारी
हरिद्वार बाईपास को दिसंबर में यातायात के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। निर्माण पूरा होने के बाद यह मार्ग शहर के मौजूदा यातायात नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा।
फिलहाल हरिद्वार में पर्यटन सीजन, सप्ताहांत, कांवड़ यात्रा और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों की संख्या काफी बढ़ जाती है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है।
रिंग रोड के संचालन में आने से शहर के भीतर जाने वाले और केवल हरिद्वार के आसपास से गुजरने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होंगे।
अर्धकुंभ के दौरान मिलेगी बड़ी मदद
हरिद्वार में वर्ष 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होना है। इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है। ऐसे में शहर की यातायात व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
रिंग रोड और स्पर-टू कॉरिडोर के तैयार होने से प्रशासन को वाहनों के रूट डायवर्जन और ट्रैफिक प्रबंधन में अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। बाहरी वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से दूर रखते हुए निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से निकाला जा सकेगा।
इससे हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों और बाजार क्षेत्रों में यातायात का दबाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार का संपर्क होगा बेहतर
स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे से जुड़ाव है। इससे दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
नया छह लेन कॉरिडोर एक्सेस कंट्रोल्ड होने के कारण लंबी दूरी के यातायात के लिए अधिक व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध कराएगा। इससे मौजूदा सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
हरिद्वार केवल धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र ही नहीं, बल्कि औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण शहर है। ऐसे में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से स्थानीय आवागमन और माल परिवहन को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
शहर के भीतर जाम से मिलेगी राहत
हरिद्वार में हर दिन बड़ी संख्या में स्थानीय वाहन, पर्यटक वाहन, बसें और व्यावसायिक वाहन चलते हैं। इसके अलावा धार्मिक आयोजनों के दौरान वाहनों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात की गति प्रभावित होती है।
रिंग रोड का उद्देश्य ऐसे यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है, जिससे हर वाहन को शहर के घने हिस्सों से होकर गुजरने की आवश्यकता न पड़े।
विशेष रूप से अर्धकुंभ के दौरान यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, जब प्रशासन को स्थानीय यातायात और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों को अलग-अलग मार्गों पर संचालित करना होगा।
कनेक्टिविटी के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा
नई सड़क परियोजनाओं का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से हरिद्वार के आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, देहरादून और हरिद्वार के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने से यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन के लिए भी बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।
अर्धकुंभ से पहले तैयारियों को मिलेगी गति
अर्धकुंभ-2027 को देखते हुए हरिद्वार में सड़क, यातायात और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर और रिंग रोड का समय पर तैयार होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि दिसंबर में हरिद्वार बाईपास यातायात के लिए खोल दिया जाता है, तो अर्धकुंभ से पहले शहर को एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक यातायात मार्ग मिल जाएगा। इसके साथ ही 51 किलोमीटर लंबे स्पर-टू हरिद्वार कॉरिडोर के शेष कार्य पूरे होने से दिल्ली-एनसीआर और हरिद्वार के बीच कनेक्टिविटी को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।