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बड़े अरमान से NEET परीक्षा देने पहुंचा युवक, फिर जो हुआ, नहीं थी उम्मीद, दौड़ती आई पुलिस टीम

एमबीबीएस का एक छात्र अपनी प्रेमिका के खर्चों को भरने के लिए नीट की परीक्षा में अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा। शुरूआत में ही वह बॉयोमीट्रिक...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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7 मई 2024, 08:09 पूर्वाह्न 0 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 3 मिनट
रिपोर्टर Uttarakhand Ekta
अपडेट किया गया 1 year पहले

एमबीबीएस का एक छात्र अपनी प्रेमिका के खर्चों को भरने के लिए नीट की परीक्षा में अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा। शुरूआत में ही वह बॉयोमीट्रिक हाजिरी में गिरफ्तार किया गया था। आरोपी ने अभ्यर्थी से दो लाख रुपये का सौदा किया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी एक एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का विद्यार्थी है।

रविवार को गुरू राम राय पब्लिक स्कूल, राजारोड, देहरादून पर एमबीबीएस (नीट) की परीक्षा हुई, जिसमें परीक्षा नियंत्रक ने परीक्षार्थियों की बायोमैट्रिक उपस्थिती ली, एसएसपी अजय सिंह ने बताया। एक परीक्षार्थी के बायोमैट्रिक से मेल नहीं खाने पर परीक्षण किया गया। पता चला कि आरोपी युवा किसी अन्य परीक्षार्थी की जगह परीक्षा में भाग ले रहा था। देव प्रकाश पुत्र ओम प्रकाश, निवासी ग्राम गिरधर घोरा, पोस्ट चितलनाना, जिला संचोर, राजस्थान, पर अरुण सक्सेना परीक्षा नियंत्रक एसजीआरआर स्कूल राजा रोड की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह राजकीय मेडिकल कॉलेज, पाली में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का विद्यार्थी है। 2022 में उसने नीट परीक्षा पास की। सितंबर 2022 में उत्तराखण्ड में ऋषिकेश, हरिद्वार और केदारनाथ घूमने के दौरान रूद्रपुर निवासी मयंक गौतम से उसने मुलाकात की। Mayank Gautam ने कहा कि वह नीट की परीक्षा पास करना चाहता है। अपनी कमजोरी के कारण असफल रहा। मयंक गौतम से सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार संपर्क में रहा। मयंक गौतम ने उसे नीट की परीक्षा पास करने के लिए दो लाख रुपये देने का प्रलोभन दिया। आरोपी देव प्रकाश ने कहा कि वह एक युवती से दोस्ती करता था।

योजना के अनुसार आरोपी ने अपनी पासपोर्ट साइज फोटो को फेसबुक के माध्यम से मयंक गौतम को भेजा, जिसे मयंक गौतम ने परीक्षा फॉर्म में लगाया. पांच मई को परीक्षा केन्द्र पहुंचा पर बायोमैट्रिक मशीन से फिंगर प्रिंट का मयंक गौतम के आधार कार्ड से मिलान न होने पर पकड़ में आ गया.

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

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