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आज उत्तराखंड में भाजपा के तीनों सारथी, चुनावी रण से पहले संगठन की 10 चुनौतियों पर लेंगे परीक्षा

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में 2027 का चुनावी रण करीब आता जा रहा है। भाजपा ने भी चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए संगठन स्तर पर सक्रियता...
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विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

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2 अक्टूबर 2026, 05:02 पूर्वाह्न 4 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
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स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 3 मिनट
रिपोर्टर Sanskriti
अपडेट किया गया 5 days पहले

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में 2027 का चुनावी रण करीब आता जा रहा है। भाजपा ने भी चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए संगठन स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में भाजपा के प्रदेश प्रभारी राम माधव और सह प्रभारी बांसुरी स्वराज व अरविंद मेनन उत्तराखंड के दो दिवसीय संगठनात्मक प्रवास पर हैं।

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद तीनों नेताओं का यह पहला संगठनात्मक प्रवास है। प्रवास के दौरान संगठन की तैयारियों, जमीनी सक्रियता और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर मंथन किया जाएगा। पहले दिन प्रदेश पदाधिकारियों और जिलाध्यक्षों के साथ बैठक प्रस्तावित है, जबकि दूसरे दिन पार्टी के सातों मोर्चों के पदाधिकारियों के साथ संवाद होगा।

संगठन के सामने होंगी 10 प्रमुख चुनौतियां

प्रभारी और सह प्रभारियों के सामने सबसे अहम सवाल संगठन की जमीनी स्थिति को लेकर होगा। प्रदेश नेतृत्व की रिपोर्ट और बूथ स्तर की वास्तविक स्थिति के बीच कितना तालमेल है, इसकी भी पड़ताल की जाएगी।

बैठकों में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर फोकस रहने की संभावना है—

  1. 70 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन की स्थिति
  2. पिछले चुनाव में हारी सीटों पर संगठन की सक्रियता
  3. कमजोर बूथों की पहचान और मजबूती
  4. बूथ समितियों की सक्रियता
  5. पन्ना प्रमुखों और बूथ कार्यकर्ताओं की भूमिका
  6. कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय और भागीदारी
  7. जिलों और मंडलों में संगठनात्मक गतिविधियों की स्थिति
  8. सातों मोर्चों की चुनावी तैयारियां
  9. प्रदेश नेतृत्व और बूथ स्तर के संगठन के बीच तालमेल
  10. आगामी चुनाव के लिए संगठन की रणनीति और प्राथमिकताएं

भाजपा नेतृत्व यह भी समझने का प्रयास करेगा कि चुनाव से पहले संगठन की कौन-सी कड़ियां मजबूत हैं और किन क्षेत्रों में अभी अधिक काम की जरूरत है। खासतौर पर पिछली बार कमजोर प्रदर्शन वाले विधानसभा क्षेत्रों और बूथ स्तर की सक्रियता पर फोकस रहने की संभावना है।

दो दिवसीय प्रवास को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक आकलन और तैयारियों की शुरुआती महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

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धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

1 hour पहले • 2 व्यूज व्यूज