उत्तराखंड

Uttarakhand: सात अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड से बंद किया इलाज, 130 करोड़ का भुगतान फंसा, कैबिनेट लेगी फैसला

आयुष्मान में राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत सात निजी अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड पर इलाज बंद कर दिया है। इससे सेवारत कर्मचारियों व पेंशनरों को मिलने वाली...
Uttarakhand Ekta

Uttarakhand Ekta

विशेष संवाददाता, Uttarakhan Ekta

शेयर करें:
10 मई 2025, 06:17 अपराह्न 1 व्यूज 3 मिनट पढ़ें
त्वरित सारांश
स्थान उत्तराखंड
पढ़ने का समय 3 मिनट
रिपोर्टर Uttarakhand Ekta
अपडेट किया गया 1 year पहले

आयुष्मान में राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के तहत सात निजी अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड पर इलाज बंद कर दिया है। इससे सेवारत कर्मचारियों व पेंशनरों को मिलने वाली कैशलेस इलाज सुविधा पर संकट खड़ा हो गया है। गोल्डन कार्ड पर इलाज करने वाले अस्पतालों का बकाया भुगतान 130 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के पास बजट नहीं है। अब इस समस्या पर कैबिनेट फैसला लेगी।

प्रदेश सरकार ने गोल्डन कार्ड पर राजकीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा दी है। इसमें कर्मचारियों व पेंशनरों से प्रति माह पद की श्रेणी के हिसाब से अंशदान लिया जाता है। इसी अंशदान से कैशलेस इलाज पर होने वाले खर्च का भुगतान किया जाता है। लेकिन अंशदान की तुलना में इलाज पर खर्च अधिक हो रहा है। जिस कारण अस्पतालों का 130 करोड़ तक भुगतान फंसा है। योजना में सूचीबद्ध हिमालयन हॉस्पिटल जौलीग्रांट, कैलाश, कनिष्क, मेदांता, नारायण हास्पिटल, धर्मशिला, ग्राफिक एरा हॉस्पिटल ने गोल्डन कार्ड पर इलाज करना बंद कर दिया है।

चार लाख से अधिक कर्मचारियों व पेंशनरों के बने गोल्डन कार्ड

योजना के तहत अब तक चार लाख से अधिक कर्मचारियों, पेंशनरों व उनके आश्रितों के गोल्डन कार्ड बने हैं। इस योजना में कर्मचारियों के आश्रितों को कैशलेस इलाज की सुविधा है। लेकिन अंशदान के रूप में कर्मचारियों व पेंशनरों से पद श्रेणी के हिसाब से 250 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक अंशदान लिया जाता है।

कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए गोल्डन कार्ड योजना में अंशदान से ज्यादा इलाज पर खर्च हो रहा है। इस योजना को किस तरह संचालित करना है जल्द ही इसका प्रस्ताव कैबिनेट रखा जाएगा। वर्तमान में गोल्डन कार्ड से होने वाले इलाज के लिए सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिया जाता है। यह योजना अंशदान से चल रही है। -डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री

और खबरें - उत्तराखंड

सभी देखें ›
उत्तराखंड

धारचूला। रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला विकासखंड के ग्राम खेला निवासी दिनेश सिंह धामी पिछले करीब 10 माह से विदेश में फंसे हुए हैं। परिजनों के अनुसार, दिनेश को लंबे समय से कंपनी की ओर से वेतन नहीं दिया गया है। आर्थिक संकट के बीच अब उनके सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की भी समस्या खड़ी हो गई है। बताया जा रहा है कि कंपनी की ओर से आवश्यक एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण दिनेश भारत वापस नहीं लौट पा रहे हैं। लंबे समय से सऊदी अरब में फंसे होने के कारण परिवार भी परेशान है और लगातार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा है। 10 महीने से वेतन का इंतजार दिनेश रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। वहां काम शुरू करने के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन बाद में कंपनी ने उनका वेतन रोक दिया। देखते ही देखते कई महीने बीत गए और करीब 10 माह से उन्हें वेतन नहीं मिला। वेतन नहीं मिलने के कारण दिनेश के सामने आर्थिक संकट गहराता चला गया। विदेश में रहते हुए बिना नियमित आय के गुजारा करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। परिवार का कहना है कि अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें भोजन और अन्य जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी ने पूरी नहीं की जरूरी प्रक्रिया मामला केवल वेतन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। जानकारी के अनुसार, कंपनी की ओर से दिनेश की भारत वापसी के लिए आवश्यक कानूनी और एग्जिट प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसके चलते वह चाहकर भी सऊदी अरब से वापस भारत नहीं आ पा रहे हैं। लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण दिनेश और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार चाहता है कि संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप कर कंपनी से उनकी बकाया सैलरी दिलाई जाए और भारत वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाए। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री से लगाई मदद की गुहार दिनेश की स्थिति को देखते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मामले को प्रशासन के सामने उठाया है। उन्होंने एसडीएम धारचूला के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर दिनेश की मदद और सुरक्षित भारत वापसी की गुहार लगाई है। ज्ञापन में दिनेश को सऊदी अरब से वापस लाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने तथा कंपनी से उनका लंबित वेतन दिलाने की मांग की गई है। साथ ही विदेश में फंसे युवक को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। परिवार को है सुरक्षित वापसी का इंतजार दिनेश के लंबे समय से विदेश में फंसे होने के कारण उनके परिजन भी चिंता में हैं। परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक तरफ वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर भारत लौटने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पा रही है। परिजनों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार के स्तर से मामले में हस्तक्षेप होने के बाद दिनेश की समस्याओं का समाधान हो सकेगा और उनकी जल्द भारत वापसी सुनिश्चित की जाएगी। विदेश में रोजगार के लिए जाने वालों की मुश्किलें भी आईं सामने यह मामला विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों को भी सामने लाता है। रोजगार के बेहतर अवसर की उम्मीद में बड़ी संख्या में उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिस्सों से लोग खाड़ी देशों में काम करने जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन, रोजगार अनुबंध, पासपोर्ट, वीजा और भारत वापसी से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो जाती हैं। फिलहाल दिनेश सिंह धामी का परिवार प्रशासन और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है। करीब 10 महीने से वेतन नहीं मिलने और भारत वापसी की प्रक्रिया अटके होने के कारण दिनेश की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी मामले में किस स्तर पर कार्रवाई करते हैं और दिनेश की सुरक्षित घर वापसी कब तक हो पाती है।

2 hours पहले • 3 व्यूज व्यूज