Thursday, February 2, 2023
uttarakhandekta
Homeउत्तराखंडताज़ा खबरहे राम यह कैसी बनी जोड़ी एक अँधा एक कोड़ी क्या ऐसी...

हे राम यह कैसी बनी जोड़ी एक अँधा एक कोड़ी क्या ऐसी हरकतों से समझा जा सकता है की पल्टूराम को ..

Bihar New Government: नीतीश कुमार ने कहा कि मैं विपक्ष को 2024 के लिए एकजुट होने की अपील करता हूं. अब रही ‘मंडल’ शब्दावली का उपयोग तो ऐसी राजनीति के परिप्रेक्ष्य में किया जाता है जो अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी और अनुसूचित जाति के इर्द गिर्द घूमती है.

Bihar Politics: बिहार में BJP का साथ छोड़कर पल्टूराम ने बुधवार को ‘महागठबंधन 2.0’ सरकार बनाने के बीच फिर एक बार असंभव काम किया राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस राज्य में ‘मंडल बनाम कमंडल’ राजनीति तेज होगी. ‘मंडल-कमंडल’ शब्दावली 90 के दशक के मध्य में हिन्दी पट्टी के दो प्रमुख राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में सुर्खियों में रही थी जहां क्षेत्रीय दलों की जाति आधारित राजनीति और BJP की हिन्दुत्व विचारधारा के बीच मुकाबला था.

‘मंडल’ शब्दावली का उपयोग ऐसी राजनीति के परिप्रेक्ष्य में किया जाता है जो अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी और अनुसूचित जाति के इर्द गिर्द घूमती है. मूल रूप से इसकी उत्पत्ति मंडल आयोग से होती है जिसका गठन 1979 में तत्कालीन जनता पार्टी सरकार ने सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गो की पहचान के लिये किया था. वहीं, ‘कमंडल’ का संदर्भ हिन्दुत्व की राजनीति के परिप्रेक्ष्य में दिया जाता है जिसकी उत्पत्ति ऋषि-मुनियों द्वारा उपयोग किये जाने वाले पात्र से होती है.

BJP का रथ हमेशा बिहार में ही रुका

बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि BJP का रथ हमेशा बिहार में ही रूका है. उन्होंने कहा कि राज्य के लोग बौद्धिक एवं राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और वे समझते हैं कि शासन में साम्प्रदायिक ताकतें सक्षम नहीं हो सकती है क्योंकि विकास से उनका कोई लेना-देना नहीं होता है. उन्होंने दावा किया कि बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और क्षेत्रीय दल का प्रभाव बना रहेगा.

जावेद ने कहा, ‘‘ स्वतंत्रता आंदोलन के समय चंपारण से आंदोलन को गति मिली थी, भारत छोड़ो आंदोलन में भी प्रदेश के लोगों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था. बिहार ने हमेशा देश को दिशा दिखाई है.’’ उन्होंने क्षेत्रीय दलों को लेकर सुर्खियों में आए BJP अध्यक्ष जे पी नड्डा के बयान का भी उल्लेख किया और कहा कि क्षेत्रीय दल यहां बने रहेंगे.

2024 में होने वाले आम चुनावों से पहले फ्लॉप विपक्ष के एकजुट होने का आह्वान किया है.

पर इससे अलीबाबा को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला
क्यों की दुनिया यह जान चुकी है ये घोटालेबाजों का गठबन्दन केवल अपने महत्वकांशा का गठबन्दन है यह ना नहीं अपने परिवार का भला करेगा

मंडल बनाम कमंडल’ राजनीति तेज होगी
वहीं, राजनीतिक विश्लेषक एवं ‘सेंटर फॉर स्टडी आफ डेवेलपमेंट सोसाइटीज’ के प्रो. संजय कुमार ने कहा कि बिहार में आने वाले समय में ‘मंडल बनाम कमंडल’ राजनीति तेज होगी. उन्होंने हालांकि कहा कि महागठबंधन के लिये बेहतर होगा कि वह ‘मंडल’ या अपने सामाजिक गठबंधन के कार्ड का 2024 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल नहीं करे.

कुमार ने कहा, ‘‘ इसमें धूरी मोदी समर्थन और मोदी विरोध हो और महागठबंधन के घटकों को अन्य पिछड़ा वर्ग को एकजुट करने का प्रयास करना चाहिए. यह मंडल 2.0 होगा. यह मंडल 1.0 से अलग होगा.’’ यह पूछे जाने पर कि बिहार के घटनाक्रम का क्या यह भी संदेश है कि क्षेत्रीय दल बने रहेंगे और बिहार में BJP के लिये उत्तर प्रदेश जैसी स्थिति नहीं होगी, कुमार ने कहा कि इसका जवाब 2024 के परिणाम से ही स्पष्ट होगा. उन्होंने कहा कि लेकिन अभी क्षेत्रीय दलों ने मजबूत संदेश दिया है कि जो कुछ महाराष्ट्र में हुआ, वैसा बिहार में नहीं हो सकता.

RJD और जदयू के लिये स्थिति उतनी आसान नहीं
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो. मनिन्द्र नाथ ठाकुर ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद ‘मंडल बनाम कमंडल’ राजनीति तेज होगी. उन्होंने कहा, ‘‘ निश्चित तौर पर राष्ट्रीय जनता दल RJD और जनता दल यूनाइटेड इस मुद्दे पर जोर देंगे. मंडल उनके लिये काफी महत्वपूर्ण है.’’ ठाकुर ने कहा कि हालांकि 10-15 वर्षो में चीजें काफी बदल गई हैं और BJP ने अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित समुदाय में अपनी पैठ बनायी है, ऐसे में RJD और जदयू के लिये स्थिति उतनी आसान नहीं होगी.

उन्होंने कहा कि बिहार के घटनाक्रम से स्पष्ट है कि क्षेत्रीय दल बने रहेंगे और BJP को भी यह सिखना चाहिए कि चुनाव पूर्व गठबंधन के सहयोगियों को नजरंदाज करना अच्छा विचार नहीं है. वहीं, राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई ने कहा, ‘‘अगर यह गठबंधन तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचता है तब बिहार की बागडोर तेजस्वी यादव संभाल सकते हैं और नीतीश कुमार 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष की पसंद बन सकते हैं. ’’ किदवई ने कहा कि जाति आधारित राजनीति न केवल बिहार में आगे बढ़ेगी बल्कि दूसरे स्थानों पर भी इसका उभार देखा जा सकता है.

RELATED ARTICLES

13 COMMENTS

  1. पैसे चाहिए? इसे यहाँ आसानी से प्राप्त करें! रोबोट को लॉन्च करने के लिए बस इसे दबाएं । http://go.tazalus.com/0j0l

  2. स्वचालित बॉट देखें, जो आपके लिए 24/7 काम करता है । Telegram – @Cryptaxbot

  3. ऑनलाइन नौकरी आपको एक शानदार लाभ ला सकती है । Telegram – @Cryptaxbot

  4. पैसा बनाओ, युद्ध नहीं! वित्तीय रोबोट वह है जो आपको चाहिए । Telegram – @Cryptaxbot

  5. # 1 नेट में वित्तीय विशेषज्ञ! नया रोबोट देखें। Telegram – @Cryptaxbot

Comments are closed.

spot_img

Most Popular

Recent Comments